DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

5 साल से बिना मीटर रीडिंग के चल रहे उद्योग

ऊर्जा प्रदेश में बिजली के गड़बड़झालों की कोई कमी नहीं है। प्रदेश की सबसे ज्यादा बिजली की खपत करने वाले उद्योगों में भी वास्तविक मीटर रीडिंग नहीं हो पा रही है। ऐसे कई औद्योगिक उपभोक्ता हैं, जिनके मीटर 60 बिलिंग साइकिल से नहीं पढ़े गए हैं। यानि कि, पांच साल से ये उद्योग बिना मीटर रीडिंग के बिजली खपत कर रहे हैं। इस तरह के 22 औद्योगिक उपभोक्ता हैं। उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग के अध्ययन में यह बात सामने आई है।
आयोग ने अप्रैल 2008 से मार्च 2009 के बिलों का अध्ययन किया है।

आयोग के मुताबिक लगातार नोटिस देने के बावजूद एलटी इंडस्ट्री में वास्तविक रीडिंग में गिरावट आई है। अक्टूबर 2007 में वास्तविक रीडिंग 80 प्रतिशत थी, जो अक्टूबर 2008 में 66 प्रतिशत हो गई। आंकड़े स्पष्ट हैं कि एक तिहाई उद्योग ऐसे हैं, जिनके बिल अनुमान के आधार पर तैयार हो रहे हैं। यह गड़बड़झाला बिना बिजली विभाग के कर्मचारियों के नहीं हो सकता। प्रदेश के अधिकांश विद्युत डिवीजनों में हालत खराब ही है। आयोग ने डिवीजनों का डाटा भी यूपीसीएल को उपलब्ध कराया है। जिससे डिवीजनों पर सीधे नजर रखी जा सके।

सबसे बुरी हालत नैनीताल डिवीजन की है, यहां सिर्फ 28.57 प्रतिशत बिल ही वास्तविक रीडिंग के आधार पर बनते हैं। दूसरे नंबर पर पिथौरागढ़ डिवीजन है जहां वास्तविक रीडिंग 55 प्रतिशत है। बेशक इन क्षेत्रों में एलटी इंडस्ट्री के उपभोक्ता बहुत अधिक नहीं हैं लेकिन इंडस्ट्री बहुल क्षेत्रों में भी स्थिति काफी चिंताजनक है। हरिद्वार में 56, रुद्रपुर में 61, सितारगंज में 67, काशीपुर में 73, रुड़की में 79 प्रतिशत ही वास्तविक रीडिंग हो रही है।

वास्तविक रीडिंग न होने की प्रमुख वजह मीटरों का न पढ़ा जाना तथा मीटरों का खराब होना है। 40 से अधिक ऐसे उपभोक्ता हैं, जिनके मीटर खराब पाए जाने के बावजूद एक साल से नहीं बदले गए हैं। आयोग ने जल्द से जल्द शत प्रतिशत वास्तविक रीडिंग के निर्देश यूपीसीएल को दिए हैं। उत्तराखंड पावर कारपोरेशन के प्रबंध निदेशक जगमोहन लाल का कहना है कि इसमें सुधार के लिए व्यापक योजना बनाई गई है, जल्द ही सुधार दिखाई देगा

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:5 साल से बिना मीटर रीडिंग के चल रहे उद्योग