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राजधानी के लिए गैरसैंण को गरमाया

गैरसैंण में राजधानी बनाने की मांग को लेकर सोमवार को उक्रांद ने गैरसैंण में प्रदर्शन किया। यहां उक्रांद ने सात दिवसीय धरना शुरू कर दिया है। प्रदर्शन से पूर्व आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए पार्टी के केन्द्रीय अध्यक्ष डा नारायण सिंह जंतवाल ने कहा कि उक्रांद का राजधानी को लेकर बिल्कुल साफ नजरिया है इस पर किसी को संदेह करने की आवश्यकता नहीं है। गैरसैंण राज्य की राजधानी बने यह दल स्टैंट है और प्रदेश की जनता भी यही चाहती है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस को राजधानी के बारे में जनता में भ्रम फैलाने का कोई हक नहीं है। उन्होंने सवाल किया कि जब कांग्रेस की सरकार प्रदेश में थी तब कांग्रेस ने गैरसैंण को स्थायी राजधानी पर दृढ़ता क्यों नहीं दिखाई। वर्तमान सरकार को समर्थन राजनीतिक स्थिरता लाने की वजह से है। कांग्रेस दिल से चाहती है कि गैरसैंण राजधानी बने तो वह इस प्रस्ताव को अपने विधान मंडल में पारित करे।

पार्टी के महामंत्री एपी जुयाल ने कहा कि राष्ट्रीय दलों का प्रदेश की स्थायी राजधानी गैरसैंण बनाने को लेकर ढुलमुल रवैया है। उत्तराखंड की जनता के संघर्ष से ही राज्य बना है और अब इसी जनता के समर्थन और सहयोग से प्रदेश की राजधानी गैरसैंण बन सकती है। द्वारहाट के विधायक पुष्पेश त्रिपाठी ने कहा कि जब तक गैरसैंण प्रदेश की राजधानी नहीं बनेगी इस पर्वतीय प्रदेश का सर्वागीण विकास नहीं हो सकता।

उन्होंने कहा कि यदि पार्टी पूर्ण बहुमत में होती तो निश्चित रूप से राज्य की राजधानी गैरसैंण बना देती। सभा को केन्द्रीय सचिव शांति भट्ट, चिकित्सा प्रकोष्ठ के अध्यक्ष डा.वाईएन भट्ट, केन्द्रीय प्रवक्ता सतीश सेमवाल, देवी प्रसाद व्यास, केन्द्रीय संगठन मंत्री गीता बिष्ट आदि ने संबोधित किया।

अध्यक्षता ब्लाक अध्यक्ष गणेश गिरी व संचालन शांति भट्ट ने किया। इधर, पार्टी द्वारा घोषित गैरसैंण राजधानी बनाओ की मांग को लेकर धरने पर सुदर्शन नेगी, एपी खंडूरी, मोहन भंडारी, सत्यप्रकाश सती, हरीश बिष्ट, प्रताप सिंह, हरीश जोशी, भीम सिंह, गजेंद्र सिंह, मोहन चंद्र, हेमंत देवली आदि पहले दिन धरने पर बैठे।

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