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नैनो टेक्नोलॉजी छोटा आकार, अवसर अपार

नैनो टेक्नोलॉजी में एटॉमिक और आण्विक कणों को छोटे आकार में बदला जाता है, लेकिन उनसे निर्मित इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं की कार्यक्षमता कहीं अधिक होती है।

नैनो टेक्नोलॉजी में अवसर
नैनो टेक्नोलॉजी के माध्यम से बायोसाइंस, मेडिकल साइंस, पर्यावरण, इलेक्ट्रॉनिक्स, कॉस्मेटिक, सिक्योरिटी और अन्य क्षेत्रों में कई अवसर हैं। यह अपराध विज्ञान में फिंगरप्रिंट्स पहचान में भी मदद करता है। सेना के लिए सेंसर और अन्य उपकरण भी बनाए जा सकते हैं। यह नैनो टेक्नोलॉजी रोबोट और मेडिकल में क्षतिग्रस्त ऊतकों के पुनर्निर्माण में मददगार साबित हो सकती है। नैनो बोट्स भी कार्बन नैनोटय़ूब्स से बनाए जा सकेंगे, जिनका प्रयोग मानव शरीर के लिए किया जा सकेगा। इससे यह अनुमान लगाया जा सकता है कि भविष्य में ऐसा कोई क्षेत्र नहीं होगा, जहां नैनोटेक्नोलॉजी का प्रयोग नहीं होगा।

भारत में नैनो टेक्नोलॉजी का भविष्य
नैनोटेक्नोलॉजी भारत में अभी अपनी शुरुआत (16 साल)  में है। पुणे के नेशनल केमिकल लैबोरेटरी (रिसर्च, डेवलपमेंट एंड कंसलटिंग ऑर्गनाइजेशन) के नैनो टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट डॉ. विजयमोहन पिल्लई के अनुसार देश में ज्यादातर नैनो संबंधी गतिविधियों पर अभी शोध जारी है। कुछ कंपनियां इस क्षेत्र में आगे बढ़ चुकी हैं और इनका  नैनो कोटिंग्स और इसके यौगिकों के व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए प्रयास कर रही हैं, लेकिन अभी सफलता कुछ हद तक ही मिली है। नैनो टेक्नोलॉजी के अगर कोई नजदीकी क्षेत्र है तो वह माइक्रो इलेक्ट्रो मैकेनिकल सिस्टम (एमईएमएस) टैक्नोलॉजी, जो एयरोनाटिक्स, हेल्थ केयर, ऑटोमोबाइल, अंतरिक्ष अनुसंधान और केमिकल फॉर्मुलेशन में प्रयुक्त किया जा चुका है।

-भारत को नैनो साइंस और नैनो टेक्नोलॉजी का वैश्विक केंद्र बनाने की योजना है। इसके लिए सरकार ने डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (डीएसटी) की मदद से पंचवर्षीय नैनो साइंस एंड टेक्नोलॉजी मिशन तैयार किया है, जो देश में नैनो क्लस्टर बनाएगा। इसके लिए 254 मिलियन डॉलर का निवेश भी किया गया है।

-बेंगलुरु स्थित इंडियन इंस्टीटय़ूट ऑफ साइंस (आईआईएससी) में वर्ल्ड क्लास एमईएमएस सुविधाओं का सेटअप तैयार किया गया है। इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि इंडस्ट्री, इंस्टीटय़ूशन कैसे एमईएमसी में विशेषज्ञता हासिल कर सकते हैं। यह सुविधा यूरोप और जापान के बाद सबसे अच्छी मानी गई है।

-भारत सरकार ने नैनो टेक्नोलॉजी के डेवलपमेंट के लिए 15 सौ करोड़ रुपए आवंटित किए हैं। 

-डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (डीआरडीओ) नैनो टेक्नोलॉजी की मदद से टीबी और टायफाइड के डाइगोनॉस्टिकस टूल्स के विकास पर कार्य कर रहा है।

-भारत का महत्वपूर्ण पब्लिक सेक्टर ड्रग्स रिसर्च इंस्टीटय़ूट, नेशनल इंस्टीटय़ूट ऑफ फार्मास्यूटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (नीपेर) मोहाली में नैनो टेक्नोलॉजी टॉक्सीसिटी गाइडलाइंस और लैबोरेटरी के विकास में लगा हुआ है जहां नई दवाओं की जांच की जा सकेगी।

-डिपार्टमेंट ऑफ इंफारमेशन एंड टेक्नोलॉजी (डिट) ने नैनो टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट प्रोग्राम लांच किया है। इसके तहत आठ छोटे और मझाेले आरएंडडी प्रोजेक्ट और दो बड़े प्रोजेक्ट-नैनो इलैक्ट्रानिक्स सेंटर (इंडियन इंस्टीटय़ूट ऑफ साइंस, बंगलुरु और आईआईटी बॉम्बे का संयुक्त प्रोजेक्ट) और नई दिल्ली स्थित नेशनल फिजिकल लेबोरेटरी (एनपीएल) में जेनेरिक डेवलपमेंट ऑफ नैनोमेट्रोलॉजी फॉर नैनोटैक्नोलॉजी पर कार्य चल रहा है।

-आईआईटी बॉम्बे में एप्लाइड मैटीरियल के लिए नैनोमैन्युफैक्चरिंग लैब खोली जा चुकी है। उपकरणों पर 7.5 मिलियन डॉलर (30 करोड़) रुपए खर्च किए गए हैं। इनका उपयोग करने वाली फर्मो में इंटेल, आईबीएम, जीई, टीसीएस आदि हैं।

-आईआईटी बॉम्बे के प्रो. राव और उनके सहयोगी नैनो टेक्नोलॉजी की मदद से कार्डिक डाइगनोसिस प्रोडक्ट आईसेन्स और सिलिकॉल लॉकेट का विकास कर चुके हैं।

-शंकर नेत्रलय अपने रिसर्च फाउंडेशन रिसर्च विजन के तहत नेशनल इंस्टीटय़ूट फॉर रिसर्च इन विजुअल साइंसेज एंड ऑप्थेलमोलॉजी क्षेत्र में जेनेटिक्स, माइक्रोबायोलॉजी और पैथोलॉजी पर रिसर्च लेबोरेटरी सुविधा का विकास कर चुका है।

करियर विकल्प
विश्व के कई देश भारत में इस सेक्टर के बूम को देखते हुए निवेश कर रहे हैं। युवा पेशेवरों के लिए यह अच्छा समय है। सरकार भी नैनो मिशन पर जोर दे रही है। देश में कई कॉलेज छात्रों को अंडर ग्रेजुएट में फिजिक्स, केमेस्ट्री या बायो टेक्नोलॉजी के साथ नैनो टेक्नोलॉजी में मास्टर्स डिग्री ऑफर कर रहे हैं।

करियर संभावना
नैनो टेक्नोलॉजी इंडस्ट्रियल ग्रोथ, हेल्थ केयर सिस्टम के साथ ही इंजीनियरिंग रिसर्च क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहा है। भविष्य में मानव जीवन माइक्रो और मिनी डिवाइसों पर निर्भर होगा, जिनका जन्म नैनो टेक्नोलॉजी की मदद से ही संभव होगा। छात्रों के लिए इस फील्ड में रोजगार के असंख्य अवसर हैं। हेल्थ इंडस्ट्री, एजुकेशन एंड अकादमिक इंस्टीटय़ूशन, कम्युनिकेशन, मीडिया और बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च इंस्टीट्यूट में रिसर्च एंड कंसलटेंट के जॉब ऑप्शन हैं। इंडस्ट्री के लिए नैनो टेक्नोलॉजी में करियर की दृष्टि से जबर्दस्त स्कोप है। इसके अतिरिक्त मध्य स्तर पर रसायनविज्ञानियों के लिए सिनथेसिस और नैनोकूलेंट्स, नैनो इलैक्ट्रॉनिक कम्पोनेंट के क्षेत्र में इंजीनियरों के लिए कई विकल्प हैं।

(प. म.)

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