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खून से अब भी लाल रेल ट्रैक

गोण्डा में टिकरी और नवाबगंज रेलवे स्टेशन के मध्य चकरसूल के कल्याणपुर मानव रहित रेलवे समपार पर रेल ट्रैक गोरखपुर-अयोध्या पैसेन्जर ट्रेन पर सवार यात्रियों के खून से अब भी लाल है। रेल लाइन के साथ बाईं तरफ दूर-दूर तक कई जगह जमीन पर खून के धब्बे फैले हुए हैं। इतना जरूर है कि यह खून सूख गया है लेकिन हादसे के 24 घंटे बाद भी इसके निशान मिटे नहीं हैं।

हादसे के दूसरे दिन भी सोमवार को  जगह-जगह खून से सने कपड़े हृदय विदारक दृश्य उत्पन्न करते रहे। आस-पास बिखरे सामान भयावह हादसे की गवाही दे रहे हैं। इन सामानों में एक टिफिन में बचा खाना और किसी नन्हे पाँव के एक जूते को जिसने भी देखा उसकी आँख छलक ही आई। किसी का झाेला छूटा तो किसी का बिस्तर बन्द। बिखरे सामानों में जूते और चप्पलों की तो गिनती ही नहीं रही।

रेलवे क्रासिंग से दो सौ मीटर दूरी तक जहाँ पर जाकर ट्रेन हादसे के बाद रुकी थी वहाँ तक रेल ट्रैक की बाईं ओर दूर-दूर तक ऐसे ही दर्दनाक दृश्य जिस ओर आँख जाती वहीं अब भी दिखाई पड़ रहे हैं। इस रेल ट्रैक पर कई जगह कहीं साड़ी तो कहीं पुरुषों के पहनने वाली धोती के साथ अन्य तमाम कपड़े इधर-उधर बिखरे रहे।

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