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15 जानें गईं, फिर भी नहीं बनेगा रेल फाटक

पूर्वोत्तर रेलवे के गोण्डा-मनकापुर-कटरा रेलखण्ड पर  चकरसूल गाँव के कल्याणपुर स्थित मानव रहित समपार पर लापरवाही से हुए रेल हादसे में 15 लोगों की जान चली जाने और 52 लोगों के जख्मी होने के बाद भी इस क्रासिंग पर फाटक बनने में कई अड़चने हैं। फाटक लगाने के निर्धारित मानक पर यह क्रासिंग पूरा नहीं करती है।

पूर्वोतर रेलवे के डीआरएम ए.के. सिंह ने सोमवार को ‘हिन्दुस्तान’ से बातचीत में कहा कि ट्रेन व्हेकिल यूनिट ने रेलवे क्रासिंगों पर फाटक व बैरियर लगाने के मानक बनाए हैं। क्रासिंग से गुजरने वाले वाहनों का लोड फैक्टर व नागरिकों के आवागमन की स्थिति व रूट पर चलने वाली ट्रेनों की संख्या  के सर्वे के आधार पर फाटक लगाने या गेटमैन तैनात करने की सिफारिश पर रेलवे बोर्ड की अनुमति के बाद ही कार्रवाई होती है।

गोण्डा की कल्याणपुर रेलवे क्रासिंग इस मानक में नहीं है। डीआरएम श्री सिंह ने कहा कि ट्रेन व्हेकिल यूनिट दो से तीन वर्ष में रेलवे क्रासिंगों का रूटीन सर्वे करती है और अपनी सिफारिश रेलवे बोर्ड के समक्ष भेजती है। तय स्टैण्डर्ड पर ही गेट मैन तैनात करने, फाटक व बैरियर लगाने की अनुमति दी जाती है। यदि क्रासिंग पर यातायात का लोड ज्यादा होता है तो मानक के अनुरूप राज्य सरकार से फ्लाईओवर ब्रिज बनाने के सम्बन्ध में भी सिफारिश होती है।

उन्होंने कहा कि कल्याणपुर रेलवे क्रासिंग पर हादसा रेलवे की गलती से नहीं बल्कि ट्रक चालक की गलती से हुआ। इसमें पहले से ही चेतावनी है कि रेल लाइन पार करते समय दाएँ-बाएँ देख लें। श्री सिंह ने कहा कि इस तरह के मानव रहित समपार पर ट्रेनों को धीरे-धीरे निकाला जाता है लेकिन ट्रेन से आकर कोई वाहन भिड़ जाए तो उसके लिए रेलवे को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है।

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