DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

भाजपा में वापसी से जसवंत ने किया इंकार

भाजपा में वापसी से जसवंत ने किया इंकार

भाजपा से निष्कासित जसवंत सिंह ने एक बार फिर भाजपा में अपनी वापसी से इंकार करते हुए पार्टी के विचार संकीर्ण हो जाने की बात कही है। पटना में संवाददाताओं से सिंह ने कहा कि जिस पार्टी ने उन्हें अपने यहां से निकाल दिया है, उसमें उनकी वापसी का कोई इरादा नहीं है। अगर भाजपा को आगे बढ़ना है और एक बड़ी पार्टी के रूप में अपने को खड़ा करना है तो विचारों में परिवर्तन लाना होगा।
   
भाजपा के नेताओं द्वारा पार्टी में वापसी के लिए संपर्क साधे जाने के बारे में सिंह ने कहा कि वह इस बात को महत्व नहीं देते कि कौन इसको लेकर उनसे संपर्क कर रहा हैं और कौन लोग उन्हें निकालने में शामिल रहे बल्कि वह देश की बेहतरी के लिए अपने मिशन में लगे रहेंगे।

अपनी किताब के उर्दू संस्करण 'जिन्ना: हिंद-पाक बंटवारे के आईने में' के विमोचन के लिए रविवार पटना आए सिंह ने कहा कि वह किसी न तो किसी अन्य दल में शामिल होने जा रहे हैं और न ही कोई नया दल बनाने का उनका कोई विचार है बल्कि राष्ट्र के सामने जो समस्याएं हैं उसे वह उचित मंच से उठाते रहेंगे।

सिंह ने जिन्ना को लेकर अपनी पुस्तक में की गई टिप्पणी को उचित ठहराते हुए कहा कि वह हिंदू-मुसलमान के बीच की खाई को पाटने के लिए अपना प्रयास जारी रखेंगे।

संसद की लोक लेखा समिति के अध्यक्ष पद से त्यागपत्र के लिए दबाव के बारे में पूछे जाने पर जसवंत सिंह ने कहा कि यह पद उन्हें भाजपा से दहेज के रूप में नहीं मिला था, बल्कि इस पद पर नियुक्ति लोकसभा अध्यक्ष द्वारा की जाती है और इस पद को छोड़कर वह भाजपा को खुश नहीं करना चाहते।
    
सिंह ने दार्जिलिंग लोकसभा क्षेत्र से पुन: अपने चुनाव लड़ने की संभावना से इंकार करते हुए कहा कि उनकी चुनावी राजनीति को छोड़ने की योजना नहीं है। उन्होंने कहा कि दार्जलिंग की सीमा चार अन्य देशों की सीमा से जुड़ी है। इसलिए सामरिक दृष्टिकोण से उसका बहुत महत्व है और ऐसे में वहां शांति स्थापित करने के लिए वह लगातार प्रयासरत रहेंगे।
    
भाजपा से निष्कासित होने से करीब तीन महीने पहले मई में पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग लोकसभा क्षेत्र से पार्टी के टिकट पर सिंह सांसद बने थे।

एक अन्य प्रश्न के जवाब में सिंह ने कहा कि गुजरात दंगे के बाद पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी वहां नेतृत्व परिवर्तन के पक्ष में थे, लेकिन इस बारे में जब उन्होंने लाल कृष्ण आडवाणी से बात की तो उन्होंने चुप्पी साध ली और कहा कि ऐसा करने से एक बड़ी समस्या पैदा हो जाएगी।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:भाजपा में वापसी से जसवंत ने किया इंकार