DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

कचरे से बनी धुंआ रहित घरेलु उपयोगी आग

अब आप कचरे से हीटर जैसी आग जलाकर उससे गैस चूल्हे, रूम हीटर और गीजर का काम ले सकते हैं।  इस अपारंपरिक उर्जा से प्रदूषण रहित सस्ता चूल्हे पर आरसी विद्यार्थी ने शोध किया है और वह लोगों को यह हुनर  सिखा रहे हैं।

आप बगैर धुंए के बॉयो कचरे के इस्तेमाल से बनी भट्ठी से शहरी बारबिक्यू का काम ले सकते हैं। कृषि, वन या किसी किस्म के बायो कचरे को 70 फीसदी जलाकर तैयार किया जाता है- चारकोल नुमांजलावन। इसमें थोड़ी मिट्टी मिलाकर सांचे में ढाला जा सकता है। यह ईंट सूडो गैसी फायर जैसी उर्जा देती है। इससे चाहे पानी गर्म करें, सर्दियों में कमरे को गर्म करें या फिर खाना बनाएं। गांव के लिए धुंआ रहित चूल्हा या शहर के लिए रूम हीटर, गीजर, बार बीक्यू।

केन्द्र सरकार में माइनिंग जियालॉजिस्ट रह चुके विद्यार्थी ने आईआईटी के रिसर्च को विकसित कर धुंआ रहित उर्जा स्रोत बनाया है। वे इसकी ट्रेनिंग उत्तरांचल की 500 महिलाओं को दे चुके हैं। वहां पा जाने वाले पिरुल या पाइन नीडिल्स से उन्होंने महिलाओं को धुंए रहित जलावन की ईंटे बनाना सिखाया। वे हिमाचल प्रदेश में जाकर भी इस पर्यावरण को प्रदूषण से बचाने वाले जलावन का निर्माण सिखाएंगे। इन दिनों

विद्यार्थी शीतला-सरस मेले में आने वाले लोगों को इस उर्जा स्त्रोत की जानकारी दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि वे अनहद सेवा नाम की संस्था को अपारंपरिक उर्जा की सलाह दे रहे हैं। बॉयो वेस्ट का इस्तेमाल कर यह जलावन शहर और गांव दोनों के लिए सुविधा जनक है। इसमें बहुत ही कम खर्च आता है। इस प्रदूषण रहित जलावन को बनाने वाली मशीन को लगाना में छह हजार से दस हजार तक का खर्च आता है, इसमें प्रतिदिन लगभग 100 ईंटे बनाई जा सकती है। जलावन की एक ईंट बगैर किसी धुंए के एक घंटे तक जलती है।

आईआईटी के प्रो.पी. ग्रोवर ने इस शोध का शुरू किया था, वे उनके दोस्त थे। विद्यार्थी ने उसी रिसर्च को लोगों के अनुरुप बनाया है। वे 1991 से समाज सेवा से जुड़े हैं। डीएलएफ फेज पांच में उन्होंने कचरा बीनने वाले बच्चों के लिए एक स्कूल चला रखा है। इस स्कूल में वे लगभग 100 छात्रों को निःशुल्क शिक्षा देने का काम कर रहे हैं।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:कचरे से बनी धुंआ रहित घरेलु उपयोगी आग