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पुलिस की दोस्ती भी बुरी और दुश्मनी भी

बुधवार के अंक में राजेन्द्र धोड़पकर का लेख ‘पुलिस वाले ही क्यों बनते हैं शिकार’ पढ़ा। इस लेख में लेखक ने पुलिस वालों को पाक साफ दिखाने का प्रयास किया है। कोई शरीफ व्यक्ति पुलिस वालों के पास नहीं जाना चाहता। यदि कोई घटना भी घट जाती है तो कोशिश करता है पुलिस से बचे। अन्यथा उसे रस्सी से सांप बनते देर नहीं लगती। पुलिसवाले इतने भ्रष्ट हो चुके हैं कि वे शिकायत करने वालों से तो रिश्वत लेते ही हैं, जिसके खिलाफ शिकायत की गई है, उसे भी रिश्वत लेकर ही छोड़ते हैं। ताकतवर के खिलाफ तो रिपोर्ट किसी थाने में लिखी ही नहीं जाती। आम आदमी पुलिस वालों से नफ़रत करता है। बुजुर्ग लोग भी यही शिक्षा देते हैं कि पुलिस वालों की दोस्ती भी बुरी और दुश्मनी भी।
सुरेन्द्र कुमार पाल, हर्ष विहार, दिल्ली

स्टूडेंट पास इतना महंगा!
दिल्ली परिवहन निगम ने जिस तरह किराया बढ़ाने का फैसला किया है, वह भी चाहते हैं कि आर्थिक मंदी का नाम लेकर हम भी अपनी रोटी सेंक लें। दिल्ली परिवहन ही घाटे में क्यों जाती है? मुंबई और कोलकाता परिवहन का किराया तो काफी कम है। सबसे हद कर दी विद्यार्थियों के लिए 12.50 रुपए वाला मासिक पास अब 100 रुपए में यह क्या निर्णय है। इसका क्या औचित्य है। सामान्य पास की तरह दुगुना कर दिया जाता तो एक बार सोचा जा सकता था, लेकिन आठ गुणा बढ़ाना समझ से परे है।
चन्दन कुमार राय, जामिया, नई दिल्ली

बस शेड की सुरक्षा हो
कॉमनवेल्थ गेम्स में बस शेड की हिफाजत के कड़े इंतजाम होने जा रहे हैं, उनको देखते हुए डीटीसी बस शेड की हिफाजत के लिए किसी कंपनी ने दिन-रात चौकीदार सिक्योरिटी वाले भी रखे हुए हैं। यह उन कंपनियों का अच्छा कार्य है। ऐसा आईजी स्टेडियम व अम्बेडकर स्टेडियम के बस शेड स्टॉप पर देखा गया। अगर ऐसा सभी नए बस स्टॉपों पर इंतजाम होता तो बस शेड आज क्षतिग्रस्त न पाए जाते। डीटीसी प्रबंधन बस शेड की सुरक्षा बनाए रखे।
श्याम सुन्दर, तिमारपुर, दिल्ली

गंभीर भूल का नतीजा
भारतीय नेतृत्व की गंभीर भूलों में से एक तिब्बत को चीन के द्वारा हड़पे जाने के समय मौन रहना भी था। तिब्बत को चीन ने जिस प्रकार हड़प लिया और हमारे नेतृत्व ने चुप्पी साध ली, वह अपने आप में एक ऐसी गंभीर चूक है, जिसका कुफल तिब्बत की जनता चीनी शासकों से भुगत रही है। साथ ही भारत भी चीन से पूर्णत: असुरक्षित हो गया है। आज चीन तिब्बत पर नाजायज कब्जा करने के साथ-साथ भारतीय भूभागों पर भी अपनी बंदर घुड़की दिखाता है। कभी चीन तिब्बत जैसे विवाद के कारण भारत पर अपनी कुदृष्टि नहीं दिखा पाता था। विडंबना यह है कि राष्ट्र नायक की गंभीर चूक का फल आज तक भारत भुगत रहा है।
सुशील कुमार नाहर, निर्मली

जनाधार खो रही भाजपा
हाल ही में तीन राज्यों के चुनाव परिणामों ने जहां कांग्रेस को सुखद अहसास कराया, वहीं भाजपा की पराजय की पुनरावृत्ति देखने को मिली। केन्द्र में हार का स्वाद चख चुकी पार्टी अब राज्यों से भी अपना जनाधार खो रही है।           
अश्विनी गुप्ता, डोईवाला

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