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निगरानी दस्ते-एसटीएफ के बावजूद बिजली चोरी जारी

विद्युत आपूर्ति के लिए पूरी तरह केन्द्रीय पूल पर आश्रित बिहार एक तरफ जहां आवश्कता के अनुरुप केंद्र से बिजली नहीं मिलने से परेशान हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रदेश में बिजली की चोरी ने बिहार राज्य विद्युत बोर्ड की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

वर्तमान में आमतौर पर बिहार में लगभग 2500 मेगावॉट बिजली की जरूरत होती है। राज्य की अपनी उत्पादन
क्षमता होने के कारण उसे बिजली की आपूर्ति के लिए पूरी तरह केन्द्रीय क्षेत्र के आवंटन पर निर्भर करना पड़ता है।   
वर्तमान में केंद्रीय पूल से बिहार के लिए 1584 से 1630 मेगावॉट का आवंटन है पर इसमें से राज्य को मात्र करीब 950 मेगावॉट ही उपलब्ध कराया जाता है, जिससे राजधानी पटना सहित राज्य के सभी जिलों को आवश्यकता के अनुरूप बिजली की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। साथ ही बिजली की आंख मिचौली से लोग काफी परेशान हैं।
   
वर्ष 2000 में राज्य के बंटवारे के बाद बिहार में विद्युत उत्पादन की मात्र दो कांटी थर्मल पावर इकाई और बरौनी थर्मल पावर इकाईयां ही बचीं है, लेकिन इन इकाईयों के लंबे समय से ठप्प रहने के बाद कुछ महीनों पूर्व किसी तरह विद्युत उत्पादन शुरू तो हुआ लेकिन इन दिनों वे भी तकनीकी खराबी आ जाने से ठप्‍प पड़ी हुई हैं। इस वजह से बिहार को विद्युत आपूर्ति के लिए पूरी तरह केंद्रीय पूल पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

 

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