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9 अप्रैल, 2020|4:23|IST

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परमाणु करार दुनिया के लिए ‘भारत का पासपोर्ट’: बुश

परमाणु करार दुनिया के लिए ‘भारत का पासपोर्ट’: बुश

भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौते में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जार्ज बुश ने शनिवार को नई दिल्ली में कहा कि यह समझौता विश्व के लिए भारत का पासपोर्ट है।

समझौते को ऐतिहासिक बताते हुए ‘एचटी लीडरशिप समिट’ में बुश ने कहा कि इससे बिना प्रदूषण फैलाए भारत को ऊर्जा उत्पादन का अवसर मिलेगा। बुश ने कहा कि (समझौते पर हस्ताक्षर करके) अमेरिका ने भारतीय परमाणु हथियार कार्यक्रम को मान्यता दी। दुनिया के लिए यह भारत का पासपोर्ट है।

बुश ने कहा कि वर्ष 2006 में हमने एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए; अब भारत के पास बिना प्रदूषण फैलाए ऊर्जा उत्पादित करने का विकल्प है।

भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौते का प्रारूप प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जार्ज बुश का 18 जुलाई 2005 को जारी संयुक्त वक्तव्य था। इसके तहत भारत अपने सैन्य और नागरिक परमाणु कार्यक्रमों को अलग-अलग करने पर सहमत हो गया था।

भारत अपने नागरिक परमाणु प्रतिष्ठानों को अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के सुरक्षा नियमों के तहत रखने पर भी राजी हो गया। इसके बदले में अमेरिका भारत के साथ असैन्य परमाणु क्षेत्र में सहयोग करने पर सहमत हो गया।

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