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विशेष राज्य का दर्जा दो और समर्थन पाओ

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार रविवार को लुधियाना में थे। एनडीए की महारैली थी। घटक दलों के बड़े नेता और मुख्यमंत्री वहां थे तो नीतीश को भी वहां होना ही था। रैली में दो बातें हुईं। एक गुजरात के मुख्यमंत्री नरंद्र मोदी जब नीतीश से मंच पर मिले तो उन्होंने नीतीश का हाथ पकड़ विजयी मुद्रा में ऊपर कर दिया। यह हस्तमिलन बहुप्रचारित हुआ। पर दूसरी बात पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया। नीतीश ने यह बता कर देश को अचंभित कर दिया कि केंद्र सरकार ने बाढ़ राहत के नाम पर जो एक हाार करोड़ रुपए दिये थे,उसे बकायदा लिखित में वापस मांगा जा रहा है। पर आज बिहार के लिए इससे भी ज्यादा और बनने वाली केंद्र सरकार के मद्देनजर सबसे अहम मांग है बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग।ड्ढr ड्ढr बिहार की आर्थिक हालत क्या रही है,यह सभी को पता है। इंडिकेटर बताता है कि बिहार देश में हर मामले में बाटम स्टेट है। सवाल है कि ऐसे में हम विशेष राज्य के मसले को सामूहिक तौर पर उठा नहीं सकते। केंद्र में जब सरकार बनने की प्रक्रिया हो तो हम केंद्र में सत्ता संभालने को लालायित गुटों पर राज्यहित में दबाव नहीं डाल सकते कि बिहार को विशेष राज्य का दर्जा जो देगा , उसे समर्थन देंगे। बिहार में लालू-राबड़ी राज से नीतीश राज तक बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग होती रही है। एनडीसी की बैठकों में मुख्यमंत्री इस सवाल को उठाते रहे हैं। हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड अथवा उत्तर पूर्वी राज्यों को विशेष राज्य का दर्जा प्राप्त है। विशेष राज्य यानी राज्य को और सुविधाएं। इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने का साधन और बेरोगारी से रोगार की ओर कदम। उत्पाद कर और इनकम टैक्स की छूट बड़े व्यापारिक घरानों को आकर्षित करने में काफी सहायक रही हैं।ड्ढr ड्ढr उत्तरांचल और हिमाचल इसके अच्छे उदाहरण हैं। इस मांग पर राज्य की पार्टियां एक होती नजर आती हैं।ड्ढr ऐसे में सरकार बनने-बनाने के मौके पर विशेष राज्य की मांग को अपना एजेंडा बना सकती हैं कि हम तभी किसी का समर्थन करंगे जब वह बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने को तैयार हो । इस मांग को किसी सरकार अथवा किसी पार्टी की मांग नहीं बल्कि बिहारियों की अस्मिता के साथ जोड़ना होगा। इससे निवेश बढ़ेगा, राज्य को अनुदान ज्यादा मिलेगा। उद्योग-धंधे लगेंगे। बिहार विकास के रास्ते आगे बढ़ेगा।ड्ढr ड्ढr हम देख रहे हैं कि केंद्र में सरकार बनने के पहले टीआरएस ने अलग तेलंगाना राज्य और मुलायम सिंह यादव ने मायावती सरकार को बर्खास्त करने का मसला उछाल दिया है कि हम उसी का समर्थन करंगे जो उनकी मांगों को मानेगा। तो बिहारी नेताओं को यह मौका चूकना नहीं चाहिए। नीतीश सरकार के साथ अन्य पार्टियों को शिद्दत के साथ बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग को सामने रखना चाहिए। वह चाहे एनडीए का अथवा यूपीए का साझा घोषणा पत्र हो उसमें इसका उल्लेख हो कि बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिया जायेगा। अब बहुत हो चुका। आलाकमानों से कहना होगा कि हमारी मांग को मानो और समर्थन पाओ।

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