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मंदी से मुक्त है, बच्चों की मस्ती

मंदी से मुक्त है, बच्चों की मस्ती

बच्चों, पिछले कुछ समय से आपने भी मंदी शब्द के बारे में बहुत सुना होगा। आपको मंदी का ज्यादा अर्थ समझ आता हो या ना आता हो, लेकिन इतना तो समझ आता ही होगा कि मंदी का मतलब है पैसों की दिक्कत होना और जब पूरी दुनिया में पैसों की दिक्कत चल रही है तो स्वाभाविक है कि इसका असर तुम्हारी पॉकेटमनी पर भी पड़ेगा। पता नहीं तुमने कभी सोचा है या नहीं, लेकिन तुम्हारे एक पसंदीदा चैनल काटरून नेटवर्क ने किड्स जीवन शैली पर एक सव्रे किया है और इसके नतीजे काफी मजेदार हैं। इन नतीजों को जन कर तुम्हें भी अच्छा लगेगा और तुम यह जान पाओगे कि तुम्हारे मम्मी-पापा मंदी के बावजूद तुम्हारी जरूरतों को पूरा करने में किसी तरह की कटौती नहीं कर रहे हैं। इस सव्रे की कुछ दिलचस्प बातों पर एक नजर डाल लें।

बढ़ी है पॉकेटमनी
तुम्हें यह जान कर खुशी होगी कि मंदी के बावजूद तुम्हारे मम्मी-पापा ने तुम्हारी पॉकेटमनी में कोई कटौती नहीं की है, बल्कि इसमें बढ़ोत्तरी ही हुई है। सर्वे बताता है कि बच्चों को मिलने वाली पॉकेटमनी में 34 प्रतिशत की भारी वृद्धि हुई है। पिछले वर्ष 7-14 वर्ष की उम्र के बच्चों को केवल 36 फीसदी माता-पिता पॉकेटमनी देते थे, जबकि इस वर्ष 41 प्रतिशत अभिभावक अपने बच्चों को पॉकेटमनी देने लगे हैं। मजेदार बात यह है कि तुम लोगों ने इस साल यानी 2009 में जेब खर्च और गिफ्ट मनी के रूप में कुल 664 करोड़ रुपये प्राप्त किये, लेकिन इस सव्रे में यह भी पता चला कि भारतीय बच्चे समझदार होते हैं, क्योंकि तुममें से 62 फीसदी बच्चे अपनी पॉकेट मनी में से कुछ पैसे बचाते हैं। अच्छी बात यह पाई गयी कि 8 प्रतिशत बच्चों ने अपने बैंक अकाउंट खुलवा रखे हैं और वे बची हुई रकम बैंक में जमा कराते हैं। 

सिनेमा-बाहर खाने में कटौती
इसके बावजूद मंदी ने माता-पिता को सोचने पर बाध्य तो किया ही है। वे छोटी उम्र के बच्चों को सिनेमा देखने और बाहर खाना खाने में कटौती कर रहे हैं। 2009 में 4-6 आयु वर्ग के बच्चों के 65 प्रतिशत अभिभावकों ने सिनेमा पर कम खर्च किया और 57 प्रतिशत अभिभावकों ने बाहर खाना खाने पर कम खर्च किया है एवं 52 प्रतिशत अभिभावकों ने अवकाश एवं आउटिंग पर कम खर्च किया है।
 
शाहरुख-कैट हैं पसंद
वैसे सिनेमा बच्चों का प्रिय शौक है। अपने पसंदीदा अभिनेता के रूप में 19 फीसदी बच्चों ने शाहरुख का नाम लिया। 13 प्रतिशत बच्चे रितिक रोशन और दस प्रतिशत बच्चे सलमान खान के दीवाने हैं। अभिनेत्रियों में कैटरीना कैफ बच्चों की पहली पसंद है। 33 प्रतिशत बच्चों ने कैटरीना को पहली पसंद बताया, जबकि 8 फीसदी ने करीना कपूर और 6 फीसदी ने ऐश्वर्या राय को पसंद किया।

जागरूक हैं आज के बच्चे
यह बात आपको प्रसन्न कर सकती है, क्योंकि इस सव्रे में पाया गया है कि आज के बच्चों में सामाजिक जगरूकता सबसे अधिक है। आज 58 प्रतिशत बच्चे गरीबी और भुखमरी को अपने समाज से दूर कर देना चाहते हैं। मजेदार बात यह है कि जब बच्चों से पूछा गया कि वे देश के प्रधानमंत्री के रूप में किसे देखना पसंद करेंगे तो 30 प्रतिशत ने सोनिया गांधी, 19 फीसदी ने राहुल गांधी, 8 प्रतिशत ने अमिताभ बच्चन और आठ ही प्रतिशत ने प्रियंका गांधी का नाम लिया। आप सोच रहे होंगे कि शाहरुख खान, शाहिद कपूर और आपके दूसरे चहेते बॉलीवुड सितारों का नाम इस सूची में क्यों नहीं आया। तो इसका कारण यह है कि आज बच्चे जानते हैं कि राजनीति और फिल्मी दुनिया में क्या फर्क है।

ट्वंटी-20 के हैं दीवाने बच्चे
बच्चों, तुम्हारा पसंदीदा गेम आज भी क्रिकेट ही है, यह इस सव्रे से भी स्पष्ट हो गया, लेकिन सव्रे में एक बात यह सामने आयी कि बच्चों को क्रिकेट का नया फॉरमेट ट्वंटी-20 ही सबसे अधिक पसंद है। इसकी एक अहम वजह यह भी हो सकती है कि क्रिकेट के इस नये फॉरमेट में कम समय लगता है और आप तीन घंटे में ही क्रिकेट का लुत्फ उठा लेते हैं। टेस्ट और वन डे क्रिकेट बहुत लंबा और उबाऊ होता है।

ऑनलाइन गेम्स पहली पसंद
बच्चों, इस सर्वे ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि आपकी पहली पसंद ऑनलाइन गेम्स हैं। 52 फीसदी बच्चों ने अपनी पसंदीदा गतिविधि के रूप में ऑनलाइन गेम्स को चुना। इंटरनेट पर सर्फिग भी बच्चों का प्रिय शगल बनता जा रहा है। बच्चों ने स्वीकार किया कि वे नेट पर ऐसे बच्चों से दोस्ती करते हैं, जिन्हें उन्होंने कभी देखा तक नहीं।
 
टीवी है पहली च्वाइस
टेलीविजन बच्चों का नंबर वन मीडिया च्वाइस बना हुआ है, 92 प्रतिशत बच्चे इसे हर रोज देखते हैं। कुछ ऐसे चैनल्स भी हैं, जिन्हें माता-पिता अपने बच्चों को देखने देना चाहते हैं और साथ-साथ खुद भी देखते हैं। 

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