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आखिर क्यों न हो घाटा

ब बदलेगी तस्वीर बदहाल सड़कें, परशान लोग, सड़कों पर राजनीति, लागू होती आचारसंहिता, पिछले कई दशकों से सड़कों का यही अंदाज है। हमार देश में सड़कें पहले बनती हैं, बाद में बिजली-पानी-सीवर की पाइपें डलती हैं। मुद्दतों से सड़क के दोनों ओर खड़े भवनों की तस्वीर तो बदल जाती है, परंतु सड़कें वही की वही। मतदाताओं के कान यह सुन-सुन कर पक गए कि जल्दी ही गांवों को सड़कों से जोड़ा जाएगा। पहले सड़कों के बीच बने मेनहोल के ढक्कनों की रक्षा तो कर लो, जो नशेड़ियों द्वारा चुरा लिए जाते हैं। राजेन्द्र कुमार सिंह, रोहिणी, दिल्ली आतंकी कुत्तों का कहर हाल ही में मेरठ में कुत्तों द्वारा किए गए हमले में कुछ बच्चों को जान से मार देना और उन्हें खा जाना अपने आप में निंदनीय घटना है। घायलों को समय पर चिकित्सा सुविधा न मिलना एवं गरीबी के कारण उनका दवा-दारू से वंचित रहना और अधिक चौंकाने वाली बात है। सांसद मेनका गांधी ने डीएम के पास अपना एक प्रतिनिधिमंडल भेज कुत्तों की हत्या रुकवाने का आग्रह किया है। परंतु ऐसी घटनाओं की भविष्य में पुनरावृत्ति न होने की जिम्मेदारी लेने को कौन तैयार है? ओमदत्त चावला, पश्चिम विहार, नई दिल्ली सफलताओं से भी सीख लें ‘स्लमडॉग मिलेनियर’ विश्व में अपनी अपार सफलता की धाक जमा अब देश में अलग-अलग तरीके से अपना जलवा बिखेर रही है। फिल्म सभी को सच्चाई, ईमानदारी, संघर्ष और मेहनत से सफलता के सर्वोच्च शिखर पर पहुंचने का संदेश देती है। गरीबों को आशा और हिम्मत देती है। संसार में किसी के लिए कुछ भी दुर्लभ नहीं। मेहनत और सत्कर्मो का शुभ फल कभी न कभी अवश्य मिलता है। हम निजी स्वार्थ से ऊपर उठकर मेहनत, संघर्ष, ईमानदारी और सच्चे मन से करना चाहें तो असंभव कुछ भी नहीं। इंदिरा सदावर्ती, कड़कडड़ूमा, नई दिल्ली जो दे दारू, वोट उसका हमार देश के चुनाव आयोग ने लोकसभा का चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों को अपने चुनाव में 25 लाख रुपए तक की राशि व्यय करने की छूट दे रखी है। जो पिलाएगा रम-उसका वोट कम, जो पिलाएगा ह्विस्की-सारी वोट उसकी। मतदाताओं की यह धारणा बन ही गई है तो इसमें नेताओं का क्या दोष? किशनलाल कर्दम, उत्तम नगर, नई दिल्लीं

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