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पुरुष अधिकारी नहीं ले सकते महिला की तलाशी : कोर्ट

पुरुष अधिकारी नशीले पदार्थ आदि रखने के मामले में महिलाओं की तलाशी नहीं ले सकते। सुप्रीम कोर्ट ने रविवार को इस आशय का एक महत्वपूर्ण फैसला दिया। अदालत के मुताबिक पुरुषों द्वारा ली गई महिलाओं की तलाशी गैरकानूनी है और ऐसा होने पर अभियोजन पक्ष का मामला अवैध हो जाएगा। सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक पुरुष अधिकारियों द्वारा किसी महिला की व्यक्ितगत तलाशी नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटैंसेस एक्ट के सेक्शन 50 की उप-धारा 4 का उल्लंघन है। जस्टिस एसबी सिन्हा, जस्टिस मुकुंदकम शर्मा एवं जस्टिस एचएल दत्ता की बेंच ने कहा कि आरोपी की तलाशी डीएसपी बल्देव सिंह ने ली थी जो कि कानून के प्रावधानों के खिलाफ है। सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक महिलाओं की तलाशी किसी महिला कर्मचारी द्वारा ही ली जा सकती है। बेंच ने यह फैसला पंजाब सरकार की एक अपील पर सुनाया जिसमें सरकार ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के एक आदेश को चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में गुरनाम कौर नामक वृद्धा और उसकी दो बहुओं, रांीत कौर और गुराीत कौर को बरी कर दिया था जबकि सेशन कोर्ट ने तीनों को नशीले पदार्थ रखने के मामले में 12 साल की सश्रम कैद की सजा सुनाई थी। इस मामले में हाईकोर्ट ने पुरुष अधिकारियों द्वारा महिलाओं की तलाशी लेने को गलत ठहराने के साथ ही अभियोजन पक्ष की कई अन्य खामियों का हवाला देते हुए आरोपियों को बरी कर दिया था। तीनों महिलाओं को पुलिस ने अमृतसर के ठाठा गांव से गिरफ्तार किया था और उनके पास से अफीम और हेरोइन की बरामदगी दिखाई थी। डीएसपी बल्देव सिंह ने दावा किया था कि उन्होंने खुद तलाशी ली थी। पुलिस ने दावा किया था कि तीनों महिलाओं की उस समय तलाशी ली गई जब वे एक ही चारपाई पर बैठी थीं। नशीले पदार्थ चारपाई के नीचे से बरामद किए गए। अधिकारियों ने बाद में एक महिला एएसआई के भी तलाशी अभियान में शामिल होने का दावा किया हालांकि सुप्रीम कोर्ट में उनका यह तर्क नहीं चला। अदालत ने कहा कि जिस चारपाई के नीचे नशीले पदार्थ बरामद किए गए उस पर बैठने मात्र से यह साबित नहीं होता कि तीनों महिलाओं ने जानबूझ कर उन्हें छुपाया था।

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  • Web Title: पुरुष अधिकारी नहीं ले सकते महिला की तलाशी