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चोटली के सवाल पर कन्नी काट गए राजनाथ

सत्ता की लड़ाई में भाजपा के सिपहसालार आपस में ही टकराने लगे हैं। पार्टी अध्यक्ष और महासचिव के बीच हुई जंग अभी जारी है। दिलों की दूरियां इतनी बढ़ गई हैं कि जेटली के बारे में पूछे गए हर सवाल को राजनाथ टाल जाते हैं। लोकसभा चुनावों में दोनों नेताओं के एकमंच पर आने की संभावना पर भी पार्टी अध्यक्ष की चुप्पी वर्चस्व की लड़ाई को हवा देती है। गोविंदपुरम के एक कार्यक्रम में आए भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष राजनाथ सिंह के चेहर पर दिल का दर्द साफ दिखाई दिया। पत्रकारों के सवालों पर राजनाथ रक्षात्मक रुख अपनाते नजर आए। जेटली से तकरार के सवाल पर पार्टी अध्यक्ष ने कहा कि उन्हें नहीं पता कि जेटली नाराज हैं। इस बार में सूचना नहीं मिली। सुधांशु मित्तल को पूर्वाचल का सह प्रभारी बनाने का सवाल भी राजनाथ टाल गए और कहा कि कुछ और पूछिए। वह गाजियाबाद और यहां से जुड़े सवाल का जवाब देते रहे। अपने भाषण में भी राजनाथ ने अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर वोट मांगे। संकेत साफ हैं कि वर्चस्व की लड़ाई ने दिलों की दूरियां बढ़ा दी हैं। गाजियाबाद की चुनावी जंग में क्या जेटली भी राजनाथ के साथ शामिल होंगे? इस सवाल पर पार्टी अध्यक्ष ने चुप्पी साध ली। उन्होंने एक साथ मंच पर आने का दावा नहीं किया। तीसर मोर्चे के गठन को चुनावी माहौल की देन बताया और कहा कि सरकार बनने पर भी मोर्चा सरकार नहीं चला पाएगा। सुधांशु मित्तल प्रकरण के बाद पहली बार गाजियाबाद आए पार्टी अध्यक्ष के चेहर की रंगत बयां कर रही थी कि चुनाव के पहले हुई रार से पार्टी को नुकसान की आशंका है और अब बयानों से बचकर डैमेज कंट्रोल की कोशिश की जा रही है।ं

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