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उद्योगों का पलायन और बड़ी कंपनियों की बेरुखी

आबादी के लिहाज से सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश को 1970 तक देश का सर्वाधिक औद्योगिकीकृत राज्य गिना जाता था। आज इस प्रदेश से उद्योगों के पलायन का रिकॉर्ड बन रहा है। प्रदेश की औद्योगिक नगरी कानपुर से ही पिछले कुछ सालों में लगभग 100 छोट-बड़े उद्योगों ने दूसरे प्रदेशों की ओर रूख कर लिया। इस पलायन के कारण हजारों मजदूर और कर्मचारी बेरोजगार हुए हैं। रियायतों और सहूलियतों के कारण उत्तर प्रदेश के उद्योग दूसरे राज्यों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। राज्य में नए उद्योग स्थापित नहीं हो पा रहे हैं। प्रदेश में बिजली की व्यवस्था बदहाल है। बिजली के अभाव में उद्योग कैसे चलेंगे, यह सोचने वाली बात है।

बिजली की आंख मिचौली उत्तर प्रदेश में आम बात है। बड़े शहरों में कटौती का आलम यह है कि कभी-कभी आठ-दस घंटों तक बिजली के दर्शन नहीं होते हैं, तो फिर छोटे शहरों और गांवों-कस्बों की हालत का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। यूपी की गर्मी वैसे भी मशहूर है। जिस समय अन्य राज्यों में मौसम सामान्य चल रहा होता है उस समय यहां आग बरस रही होती है। आधा नवंबर बीत जाने के बाद भी गर्मी का प्रकोप कम नहीं हुआ है। दिन निकलने के साथ ही सूरज देवता झुलसाने लगते हैं। ऐसे में बिजली की किल्लत क्या कहर ढाती है, बयां करना जरा मुश्किल है।

यहां सेवा और उद्योग क्षेत्र के विकास की काफी संभावनाएं हैं। लेकिन इस प्रदेश में देश की सबसे बड़ी दस कंपनियों रिलायंस, ओएनजीसी, भारती एयरटेल, रिलायंस कम्युनिकेशन, इनफोसिस टेक, टाटा कंसलटेंसी, आईसीआईसीआई, एसबीआई, भेल, लार्सन ऐंड टुब्रो में ज्यादातरकंपनियों का कारोबार उत्तर प्रदेश में नहीं है। इसलिए पर्याप्त मानव संसाधन के बावजूद भी लोग बेरोजगार हैं। उत्तर प्रदेश में सॉफ्टवेयर से जुड़ा निवेश भी नहीं हो पा रहा है।

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