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कृषि अधारित उद्योगों को बढ़ाने की चुनौती

उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था मूलतः कृषि आधारित है। गन्ना उत्पादन में राज्य अग्रणी स्थान रखता है फिर भी आज कृषि आधारित उद्योग राज्य में दम तोड़ रहे हैं। गन्ना मिलों की हालत भी ठीक नहीं है। भारत की तरह उत्तर प्रदेश मूलतः कृषि आधारित प्रदेश है और आंकड़ों के लिहाज से प्रदेश के 66 और ग्रामीण क्षेत्र के लगभग 78 प्रतिशत लोग काम के लिए कृषि पर आधारित हैं। लेकिन कृषि आधारित कामगारों से आशय केवल किसान और खेतिहर मजदूर तक सीमित नहीं है वरन् पशुपालक, आदिवासी, खनन मजदूर, कृषि कार्य में सहायता करने वाले कृषि उपकरणों की मरम्मत करने वाले, मोटे आनाज और सब्जी-फल बेचने वाले कृषि उत्पादों को तोलने और धोने वाले आदि सभी कृषि पर आधारित कर्मकार हैं।

उत्तर प्रदेश की अधिकतर आबादी कृषि पर निर्भर है। वास्तविक संख्या इससे कहीं ज्यादा भी हो सकती है क्योंकि खेती न तो केवल एकल उपक्रम है और न ही वर्ष के खास समय पर होने वाला काम है। उत्तर प्रदेश की आज की परिस्थितियां हम सभी से छिपी नहीं हैं। बात किसानों के संदर्भ में कही जाए तो आज एक तो किसान के पास खेती करने को जमीन नहीं है, दूसरी तरफ बढ़ता भूमि अनुत्पादन उन्हें प्राकृतिक रूप से भूमिहीन बना रहा है। सच कहा जाए तो किसान ही वह श्रेणी है जिस पर सब तरफ़ से मार पड़ रही है, चाहे वह प्रकृति की हो, सरकारी नीति की हो अथवा बाजार की।  किसान सब कुछ चुप-चाप सहने को विवश है। उत्तर प्रदेश में दुनिया की सबसे उर्वर भूमि है, विस्‍तृत बाजार और पूंजी भी मौजूद है, लेकिन गलत आर्थिक नीतियों और निकम्‍मेपन के कारण यहां का स्‍वाभाविक विकास बाधित है।

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