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मनमोहन-जियाबाओ मुलाकात, कहा संबंधों में बाधा न बनें मतभेद

मनमोहन-जियाबाओ मुलाकात, कहा संबंधों में बाधा न बनें मतभेद

अरुणाचल प्रदेश के मुद्दे पर भारत और चीन के बीच हाल की राजनयिक तनातनी को अनदेखा करते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और उनके चीनी समकक्ष वेन जियाबाओ ने शनिवार को यह स्पष्ट किया कि मतभेदों को दोनों देशों के बीच संबंधों के विकास में बाधा नहीं बनने देना चाहिए।

आसियान सम्मेलन से इतर इस थाई बीच रिसोर्ट में दोनों नेताओं के बीच सकारात्मक महौल में मुलाकात हुई जिन्होंने आपसी विश्वास, सौहार्द और पारस्परिक समझ के महत्व को रेखांकित किया।

दुस्तिन थानी होटल में लगभग एक घंटे तक चली बैठक में दोनों नेताओं ने अरुणाचल प्रदेश और तिब्ब्ती आध्यात्मिक गुए दलाई लामा की अगले महीने प्रस्तावित अरुणाचल यात्रा जैसे विवादास्पद मुद्दों का उल्लेख नहीं किया। मनमोहन ने कहा कि दोनों पक्षों को राजनयिक स्तर पर बेहतर समझ रखनी चाहिए, ताकि द्विपक्षीय संबंध मजबूत हो सकें।

विदेश मंत्रालय (पूर्वी) में सचिव एन रवि ने संवाददाताओं को बताया कि वेन मनमोहन के साथ इस बात पर सहमत दिखे कि द्विपक्षीय संबंधों में उठने वाले मुद्दों को बातचीत के जरिए उचित ढंग से निपटाया जाना चाहिए और इन्हें मैत्री संबंधों के विकास में बाधा नहीं बनने देना चाहिए।

यह बैठक ऐसे समय हुई है जब अरुणाचल पर चीन की ओर से भड़काउ बयान आने और भारत द्वारा उस पर कडी़ प्रतिक्रिया जताए जाने के बाद दोनों देशों ने मेल मिलाप का रुख दिखाया।

चीन अरुणाचल प्रदेश को विवादास्पद क्षेत्र मानता है और उसने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के अरुणाचल दौरे पर आपत्ति जताई थी। इस पर भारत ने कडी़ प्रतिक्रिया व्यक्त की थी और राज्य को देश का अभिन्न हिस्सा बताया था। रवि के अनुसार वेन से मुलाकात के दौरान मनमोहन ने कहा कि किसी भी पक्ष को अपने मतभेदों को दोनों देशों के बीच संबंधों के विकास में बाधा नहीं बनने देना चाहिए।

वेन ने मनमोहन और चीनी राष्ट्रपति हू जिन्ताओ के बीच हुई 10 सूत्री रणनीति और पिछले साल जारी विजन डॉक्यूमेंट का उल्लेख किया जो संबंधों में सुधार, खासकर व्यापार और वाणिज्य तथा सीमाओं पर शांति कायम रखने पर केंद्रित था। वेन की टिप्पणी के जवाब में मनमोहन ने कहा कि इन समझौतों को कार्यान्वित करना महत्वपूर्ण है।

चीनी प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि दोनों पक्षों को राजनयिक संबंधों की स्थापना की 60वीं वर्षगांठ के अवसर को द्विपक्षीय संबंधों को उंचाइयों पर ले जाने के लिए उपयोग करना चाहिए। पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चीन की 1949 में स्थापना के बाद दोनों देशों के बीच एक अप्रैल 1950 को राजनयिक संबंध शुरू हुए थे।

मनमोहन ने कहा दोनों देशों के बीच शुरू हुए राजनयिक संबंधों की साठवीं वर्षगांठ उचित तरीके से मनाना चाहिए। वेन ने कहा कि 21वीं सदी एशिया की सदी बन चुकी है। भारत और चीन को मेल मिलाप और सदभावना के साथ रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय आदान प्रदान को बनाये रखने के लिए चीन तैयार है।

रवि ने बैठक के दौरान इस बात पर जोर दिया गया कि भारत चीन संबंधों को मजबूत करना दोनों देशों, क्षेत्र और दुनिया के हित में होगा। जलवायु परविर्तन, विश्व व्यापार और वित्तीय संकट जैसे वैश्विक मुद्दों पर चीन के साथ काम करने की अपनी प्रतिबद्धता को मनमोहन सिंह ने दोहराया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल की अगले वर्ष होने वाली चीन दौरे से भारतीय पक्ष को काफी उम्मीदे हैं। वेन ने कहा, हम भारत के साथ स्वस्थ और स्थिर संबंध चाहते हैं। वेन ने मनमोहन को पुराना दोस्त करार देते हुए दोनों नेताओं के बीच हुए पिछली मुलाकातों को याद किया। उन्होंने कहा, हमें विश्वास है कि आने वाले वर्षों में हमारे बीच अच्छे संबंध होंगे।

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