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पाक की सैन्य सहायता पर लगे कठोर प्रतिबंध

पाक की सैन्य सहायता पर लगे कठोर प्रतिबंध

भारत की चिंताओं को स्वीकार करते हुए अमेरिकी कांग्रेस ने पाकिस्तान को दी जाने वाली 2.3 अरब डालर की सैन्य सहायता पर कठोर प्रतिबंध लगाने संबंधी एक विधेयक को शुक्रवार को पारित कर दिया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इस धनराशि का क्षेत्र में शक्ति संतुलन को प्रभावित करने के लिए दुरूपयोग न किया जा सके।

यह सैन्य सहायता एक वर्ष के भीतर दी जाएगी और यह अगले पांच साल तक पाकिस्तान को दी जाने वाली प्रति वर्ष 1.5 अरब डालर की सहायता से अतिरिक्त होगी। पांच साल तक दी जाने वाली सहायता कैरी लुगर विधेयक के जरिये दी जाएगी जिस पर अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने इस माह के शुरू में हस्ताक्षर किए थे।

डेमोकेट्रिक सीनेटर बॉब मेंडेज ने कहा कि हम इस बात को नजरअंदाज नहीं कर सकते कि पाकिस्तान को यह धन मिल रहा है। आतंकवादियों से लड़ने और आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई में अमेरिका के प्रयासों का समर्थन करने पर आने वाले खर्च की उसको भरपाई की जा रही है।

उन्होंने कहा हमारी अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए यह संघर्ष महत्वपूर्ण है और हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि इसके लिए हमारे समर्थन का गलत इस्तेमाल न हो। यह सुनिश्चित करना केवल हमारे ही लिए सही ही नहीं है कि अमेरिकी करदाताओं का धन तयशुदा मकसद में इस्तेमाल हो, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और करदाताओं के धन के प्रहरी होने के नाते यह हमारी जिम्मेदारी भी है।

680 अरब डालर के दी डिफेंस आथराइजेशन बिल के तहत पाकिस्तान को 2.3 अरब डालर की सहायता दी जा रही है। इस विधेयक को सीनेट ने कल मंजूरी दी जबकि प्रतिनिधि सभा ने इस माह के शुरू में ही विधेयक को पारित कर चुकी है। यह विधेयक राष्ट्रपति ओबामा के पास जायेगा और उनके हस्ताक्षर के बाद कानून बन जाएगा।

वर्ष 2010 के लिए दी डिफेंस आथराइजेशन बिल में सीनेटर बाब मेंडेज तथा बॉब कोर्कर के संशोधनों को भी शामिल किया गया है जिनके अनुसार, विदेश और रक्षा मंत्री यह आश्वासन देंगे कि यह धनराशि दिया जाना अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है और क्षेत्र में यह शक्ति संतुलन को प्रभावित नहीं करेगा।
भारत यह महसूस करता रहा है कि पाकिस्तान को दी जाने वाली अमेरिकी सहायता पारंपरिक रक्षा उपकरणों के बजाय आतंकवाद विरोधी क्षमताओं के निर्माण पर अधिक केन्द्रित होनी चाहिए क्योंकि पारंपरिक रक्षा उपकरणों का अन्य मकसदों में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। रक्षा सहायता के इस्तेमाल के संबंध में भारत यह भी चाहता है कि अमेरिका पाकिस्तान से अधिक जवाबदेही की मांग करे।

पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने पिछले माह कहा था कि उनके कार्यकाल में उपलब्ध करायी गयी सैन्य सहायता का इस्तेमाल भारत के खिलाफ रक्षा तंत्र को मजबूत बनाने में किया गया। उसके बाद ही अमेरिका ने भारत की चिंताओं को स्वीकार किया है।

अमेरिका ने कहा था कि उसने मुशर्रफ के बयान को बेहद गंभीरता से लिया है। अमेरिका पर 9/11 के आतंकवादी हमलों के बाद से पाकिस्तान को आतंकवाद के खिलाफ अभियान के तहत कोएलिशन सपोर्ट फंड से अमेरिका की ओर से 7.6 अरब डालर की राशि मिल चुकी है।

विधेयक में कहा गया है कि पाकिस्तान को भारी सहायता पैकेज दिए जाने से पूर्व पेंटागन को इस बात की पुन: पुष्टि करनी होगी कि इस्लामाबाद अल कायदा, तालिबान तथा अन्य आतंकवादियों के खिलाफ ठोस संघर्ष कर रहा है।

प्रावधान में पेंटागन को निर्देश दिया गया है कि वह इस बात पर निगरानी रखे कि पाकिस्तान उसे दिए जाने वाले सैन्य हार्डवेयर का इस्तेमाल कैसे कर रहा है। इससे यह सुनिश्चित हो सकेगा कि अमेरिका की मंजूरी के बिना इन रक्षा उपकरणों और सेवाओं का अन्य पक्षों को हस्तांतरण प्रतिबंधित हो सकेगा।

रिपब्लिकन कोर्कर ने कहा कि इस प्रावधान का सीधा सा मकसद यह सुनिश्चित करना है कि अमेरिकी करदाताओं की खून पीसने की गाढ़ी कमाई उसी मद में इस्तेमाल हो जिसके लिए उसे प्रदान किया गया है। विधेयक में व्हाइट हाउस को निर्देश दिया गया है कि वह पाकिस्तान में दीर्घकालिक सुरक्षा तथा स्थिरता की दिशा में प्रगति के संबंध में प्रत्येक 180 दिनों के बाद सांसदों को एक रिपोर्ट भेजेगा।

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