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किस्तों पर खरीदारी भी मुमकिन है क्रेडिट कार्ड से

अगर आप अपने क्रेडिट कार्ड से कोई बड़ी खरीद करते हैं, तो कई बैंक इसका भुगतान आसान मासिक किस्तों में करने की सुविधा भी देते हैं। और हां, इस पर लगने वाले ब्याज की दर भी आम कर्ज पर वसूले जाने वाले ब्याज से कम ही होती है। कैसे, इसके बारे में जानिए इस विशेष आलेख से-

अखबार में छपे विज्ञापनों को ध्यान से पढ़ना, इनकी लिस्ट बनाते जाना और तमाम डील्स और ऑफर्स की तुलना करना. त्योहारी सीजन में रिटेल सेक्टर मिडल क्लास को इसके लिए तकरीबन मजबूर कर देता है। किसी भी सामान की खरीदारी के लिए सबसे अच्छा और आसान तरीका तो कैश पेमेंट ही है। इससे आपको डिस्काउंट भी मिल सकता है, जिसका मतलब है कि आप यथासंभव कम से कम लागत पर सामान खरीद रहे हैं। लेकिन अगर आपके पास नकदी इफ़रात में नहीं है, तो आप प्लास्टिक मनी, यानी क्रेडिट कार्ड का सहारा भी ले सकते हैं। यही नहीं, अब आपके पास मासिक किस्तों (ईएमआई) पर सामान खरीदने का विकल्प भी मौजूद है। लेकिन सवाल ये है कि क्या ऐसा करना समझदारी का काम है?
चार विकल्प
क्रेडिट कार्ड से खरीदारी चार प्रकार से की जा सकती है। पहला, सारी बकाया रकम का भुगतान तय तारीख पर करके, उधारी का चक्कर ही न रखना, और इस प्रकार ब्याज की मार से साफ बचे रहना। इसमें आपको 45 से 51 दिन की ब्याज-मुक्त मियाद की सुविधा मिल जाती है। दूसरा तरीका है- हर महीने क्रेडिट कार्ड बकाए का न्यूनतम 5 प्रतिशत का भुगतान करते रहना और बकाए की रकम को आगे टालते रहना। मगर ये विकल्प खर्चीला हो सकता है, क्योंकि आपको इस पर हर महीने करीब 3 प्रतिशत ब्याज देना पडेगा और उस महीने में अगली खरीद पर ब्याज-मुक्त मियाद की सुविधा भी नहीं मिलेगी।
तीसरा विकल्प है- बकाया रकम का ‘बैलेंस ट्रांसफर’ करके ब्याज की बचत करना। इसके बाद आखिरी रास्ता है खरीदारी की पूरी रकम को समान मासिक किस्तों में तब्दील करवा लेना। अगर आप इसे सही ढंग से सोच-समझकर अपनाएं, तो ये आपके लिए ही फायदेमंद साबित हो सकता है। 
मासिक किस्त की सुविधा
इसमें आपको बकाया राशि का भुगतान किस्तों में करने की छूट मिल जाती है। इसका फायदा ये है कि आपको प्रति माह केवल डेढ़ से दो प्रतिशत की दर पर ब्याज देना पड़ता है, जबकि आमतौर पर ब्याज दर तीन प्रतिशत होती है। इसके अलावा, अगर सारी बकाया रकम नहीं चुकाई गई हो, तब भी नई खरीद पर ब्याज-मुक्त मियाद की सुविधा मिलती रहेगी।
यह सुविधा पर्सनल लोन जैसी ही है। फर्क यह है कि पर्सनल लोन के नियम ज़रा कड़े हैं और कागज़ी खानापूरी की अपनी प्रक्रिया भी है। जबकि ईएमआई का तरीका पेपरवर्क और लोन की मंजूरी के इंतजार से निजात दिला देता है। आपका क्रेडिट कार्ड ही आपको लोन दिला देता है, और आपकी मासिक किस्तों का भुगतान भी फौरन शुरू हो जाता है। यही नहीं, इसमें आपको यह भी पहले से मालूम होता है कि हर महीने कितनी रकम जमा करनी है। अगर ये रकम बड़ी नहीं है, तो ये तो पर्सनल लोन से भी अच्छी सुविधा साबित हो जाती है।

तरीके और भी हैं
क्रेडिट कार्ड जारी करने वाले सभी बैंक अलग से ईएमआई कार्ड जारी नहीं करते, लेकिन ज्यादातर बैंक पहले से मौजूद नॉन-ईएमआई कार्ड पर ही इस विकल्प की ऑफर देते हैं। आप भी अपने बैंक से मालूम कर सकते हैं कि आपके कार्ड पर यह सुविधा है या नहीं। उदाहरण के तौर पर, एचडीएफसी बैंक क्रेडिट कार्ड होल्डर्स को बैंक से मालूम करना होता है कि उनके कार्ड पर ईएमआई कन्वजर्न ऑफर है या नहीं। कुछ व्यापारिक प्रतिष्ठान एचडीएफसी बैंक से समझौता करके उसके ग्राहकों को ऐसी सुविधा देते हैं। ऐसे में आप एचडीएफसी बैंक क्रेडिट कार्ड के जरिए इन प्रतिष्ठानों से की गई खरीद पर ईएमआई की सुविधा उठा सकते हैं। दूसरी ओर एक्सिस बैंक का गोल्ड प्लस कार्ड पांच हजार से ज्यादा की किसी भी खरीद का भुगतान 6, 12 या 24 महीने की आसान किस्तों में करने की सुविधा देता है।
भुगतान की अवधि अलग-अलग बैंकों या कार्डो में अलग-अलग हो सकती है। इसी प्रकार इस सुविधा को हासिल करने के लिए जरूरी खरीद की न्यूनतम सीमा भी अलग-अलग होती है।
ईएमआई की लागत
हर ईएमआई, या मासिक किस्त में मूलधन का समान हिस्सा और उस पर लगने वाला ब्याज शामिल होता है। इसके अलावा, ज्यादातर मामलों में आपको एकमुश्त प्रोसेसिंग फीस का भुगतान भी करना होता है।
कुछ बैंक ब्याज-मुक्त ईएमआई स्कीमों की ऑफर भी देते हैं, और वे आपसे केवल प्रोसेसिंग फीस वसूल करते हैं। जबकि कई बैंक प्रोसेसिंग फीस के अलावा ब्याज अलग से चार्ज करते हैं, जो क्रेडिट कार्ड में रोल-ओवर की सुविधा से सस्ता पड़ता है। मसलन, क्रेडिट कार्ड पर 5 हजार रुपए के किसी ट्रांजेक्शन को रोल-ओवर करने के लिए आपको प्रति माह केवल न्यूनतम 5 प्रतिशत रकम जमा करनी होती है, तो आपको पूरी रकम के चुकाने में पांच साल का वक्त लग जाएगा। मगर इसे ईएमआई में तब्दील कराना चाहें, तो पहले से यह जरूर मालूम कर लें कि इससे आपको ज्यादा महंगा तो नहीं पड़ेगा।
क्रेडिट कार्ड पर ब्याज दर कैसे काम करती है, आइए इसे एक उदाहरण के जरिए समझने की कोशिश करते हैं। मान लीजिए आपने एक हजार रुपए की खरीद की, जिसको भुगतान आपको 12 मासिक किस्तों में करना है। तो डेढ़ प्रतिशत की घटती मासिक ब्याज दर पर आपकी किस्त 91 रुपए 68 पैसे बनेगी। इसका मतलब हुआ रिड्यूसिंग बैलेंस पर 18 प्रतिशत (1.5 गुणा 12 महीने) और 10 प्रतिशत की फ्लैट ब्याज दर। इस प्रकार बारह महीने के बाद आप पाएंगे कि आपने खरीदे गए सामान के विक्रय मूल्य से 10 प्रतिशत ज्यादा का भुगतान कर दिया। इसके अलावा, आपने जो प्रोसेसिंग फीस दी है, वो अलग है।
यही नहीं, अगर आप बकाया रकम का भुगतान जल्दी करना चाहते हैं, तो प्रीपेमेंट चार्जेज भी देने पड़ेंगे। इससे आखिरकार आपको ही महंगा पड़ सकता है। लेकिन फिर भी, पर्सनल लोन की बनिस्पत ये आपको सस्ता ही पड़ेगा।
पूछे जाने वाले सवाल
आजकल बैंक काफी सयाने हो गए हैं, और फटाफट कॉल करके आपको ऑफर दे देते हैं कि क्रेडिट कार्ड पर की गई खरीद को ईएमआई में तब्दील करा लें। इससे मासिक किस्तों पर भुगतान आपको आसान तो लग सकता है, लेकिन इस तरह कर्ज इकट्ठा होते जाने से आप आखिर परेशानी में भी पड़ सकते हैं। इसलिए सबसे बेहतर तो यही है कि आप ‘जीने के लिए भुगतान करने’ में यकीन रखें, न कि ‘भुगतान करने के लिए जीने’ में। इसका रास्ता है, बैंक को हां कहने से पहले प्रोसेसिंग फीस, ब्याज की दर, प्रीपेमेंट चार्ज और मियाद में तब्दीली के बारे में तमाम जानकारी प्राप्त कर लें। इसके बाद हिसाब लगाएं और देखें कि सौदा महंगा तो नहीं पड़ेगा। और अगर आप सारी रकम तय समय में ही चुका सकते हैं, तो ईएमआई के चक्कर में न पड़ना ही सबसे सही रास्ता है। अलग-अलग चार्जेज पर गौर करने के अलावा यह भी सुनिश्चित कर लें कि अलग-अलग विशेष स्कीमें आपके लिए कैसे काम करेंगी। रिपेमेंट शिड्यूल पर भी ध्यान से गौर करें। पैनल्टी के बारे में साफ-साफ जानकारी ले लें और इससे हर कीमत पर बचकर रहें। और सबसे बड़ी समझदारी तो इसी में है कि अपने खर्च पर कसकर लगाम लगाकर रखी जाए।
(इस लेख में दिए गए विचार ‘हिन्दुस्तान’ अखबार के नहीं हैं, हमने महज पाठकों को जानकारी देने के मकसद से ‘आउटलुक मनी’ की यह सामग्री ‘मिंट’ से ली है। पाठकों को कोई भी कदम उठाने से पहले अपने स्तर पर रिसर्च कर लेनी चाहिए। इस सामग्री के आधार पर कदम उठाने से होने वाली किसी भी संभावित हानि के लिए ‘हिन्दुस्तान’, ‘मिंट’ या ‘आउटलुक मनी’ जिम्मेदार नहीं होंगे।)

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