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नया साल यानी डायरी का मौसम

साल के इस वक्त में डायरियों के छपने का सिलसिला शुरू हो जाता है। उसकी वजह यह होती है कि नया साल आने से पहले ही लोगों को डायरियां मिल जाएं। असल में मुङो तो कभी उन्हें खरीदने की जरूरत नहीं पड़ी। मुझे तो वह मिल ही जाती हैं।

कोई न कोई कॉरपोरेट घराना या प्रकाशक मुझे डायरियां देता ही रहता है। इसीलिए कई डायरियां इकट्ठी हो जाती हैं। अब मुझे तो एक ही डायरी चाहिए। एक से ज्यादा का मुझे क्या करना है? सो मैं एक डायरी अपने लिए रख लेता हूं। वही मेरी लिए काफी है। बाकी सब लोगों में बांट देता हूं।
डायरी रखने और लिखने का शौक है मुझे। इसीलिए एक डायरी हमेशा अपने पास रखता हूं। जब मेरा मूड होता है, तो उसमें लिखता रहता हूं। लगातार डायरी का इस्तेमाल करने की वजह से ही मुझे अंदाजा है कि डायरी में क्या-क्या होना जरूरी है? या यह भी कि उसमें क्या-क्या नहीं होना चाहिए। अक्सर डायरी देखते हुए मुझे महसूस होता है कि डायरी बनाने वाले इस पर ज्यादा नहीं सोचते। वे हर साल एक ही तरह की डायरी छापते रहते हैं। जाहिर है उसमें ज्यादातर चीजें किसी काम की नहीं होतीं।
डायरियां तो अब भी खूब चलती हैं। लेकिन एक वक्त था, जब पॉकेट डायरी खूब चलती थी। उसके साथ एक पेंसिल भी होती थी। लोग उन्हें अपने कोट की जेब में रखते थे। ताकि दिन भर के कामों का हिसाब-किताब रख सकें। जेब में रखने का यह भी फायदा था कि जब चाहे आप कुछ भी नोट कर सकते हैं। लेकिन आजकल शायद ही कोई उस डायरी को रखता हो।
पॉकेट तो नहीं, लेकिन टेबल डायरी इधर खूब इस्तेमाल होती है। मुझे लगता है कि वह डायरी बहुत बड़ी नहीं होनी चाहिए। उसमें कुछ जरूरी चीजें ही होनी चाहिए। मसलन, छुट्टियां, पिन कोड और एसटीडी कोड वगैरह। मेरा खयाल है कि उसमें अपनी सेहत के लिए एक पेज होना चाहिए। उसमें ब्लड ग्रुप, ब्लड प्रेशर और वजन वगैरह की जानकारी हो, तो बेहतर है। ताकि जरूरत पड़ने पर उनका खट से इस्तेमाल हो सके। यों डायरी में अक्सर जो-जो  होता है, उसकी खास जरूरत मुङो तो नहीं महसूस होती।
  
ढेरों डायरियां मेरे पास आती जरूर हैं। लेकिन मैं तो एक ही डायरी का फैन हूं। कई सालों से मैं उसी डायरी का इस्तेमाल कर रहा हूं। यह डायरी पंजाबी के एक मामूली से प्रकाशक निकालते हैं। ये हैं अमृतसर के चतर सिंह जीवन सिंह। इसे जीवन डायरी कहा जाता है। उस डायरी में वह सब होता है, जिसकी मुझे दरकार होती है। अगर आप एकसाथ हिंदी, उर्दू, गुरमुखी और अंगरेजी में कुछ देखना चाहते हैं तो वहां मिल जाता है। उसमें रोमन कैलेंडर होता है। आप अपना विक्रमी संवत भी उसमें देख सकते हैं। हिजरी कैलेंडर के लिए भी कहीं और जाने की जरूरत नहीं।
 उस डायरी में सूर्य उदय और अस्त होने का समय होता है। चांद के निकलने की जानकारी होती है। अलग-अलग दिनों में चांद की पोजीशन उसमें पता चल सकती है। हर समाज के तीज और त्योहार उसमें देखे जा सकते हैं। हर इलाके के नेताओं की जयंती और पुण्यतिथि भी उसमें होती है। फिर डायरी के पन्नों पर काफी जगह होती है, जिसमें आप अपने पूरे दिन के कामकाज लिख सकते हैं। इस डायरी का मैं इंतजार करता हूं। बस, मुङो उन्हें वक्त से पहले याद दिलाना होता है, जिससे डायरी नए साल से पहले मिल जाए। और मैं कोई दिन ‘मिस’ न करूं।

तजुर्बा
एक बैंक को ब्रांच मैनेजर की जरूरत थी। उसके लिए उन्होंने एक अखबार में विज्ञापन निकाला। और उस पद के लिए आवेदन मांगे। उसमें खासतौर से मांग की गई थी कि उसके लिए तजुर्बा होना बेहद जरूरी है।

संता ने विज्ञापन को देखा। बस, अपना आवेदन भेज दिया। कुछ दिन के बाद उसका इंटरव्यू होना था। इंटरव्यू से कुछ पहले उसका दोस्त बंता ‘गुड लक’ कहने के लिए आया। उसने देखा कि वह घर पर नहीं है। पता चला कि वह बाग में है। वहां जा कर बंता देखता है कि संता एक आम के पेड़ की शाखा से लिपटा पड़ा है। बंता परेशान हो गया। उसने पूछा, ‘अरे संता तुझे क्या हो गया है? तू ये क्या कर रहा है?’ संता ने जवाब दिया, ‘मेरे दोस्त, मैनेजर बनना है न इसलिए तजुर्बा ले रहा हूं। और पेड़ की ब्रांच से लिपटा हुआ हूं। विज्ञापन में लिखा था कि वह बेहद जरूरी है।’- हरजीत कौर, नई दिल्ली

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