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बच्चों के सिर से उठा मां-बाप का साया

एड्स की भयावहता अब ग्रामीण इलाके में भी सामने आने लगी है। पहले महानगरों मंे ही इस जानलेवा बीमारी से पीड़ितों की मौत की खबरं मिलती थीं। तब गावों के लोग कहते थे, क्या बला है एड्स? लेकिन गांवों के बेरोगार नौजवान नौकरी की तलाश में मुंबई, दिल्ली, कोलकाता आदि महानगरों में क्या गए, वहां से एड्स की सौगातें लेकर लौटने लगे।ड्ढr ड्ढr अभी ताजा घटना पालीगंज के बीबीपुर गांव में हुई। एड्स से पीड़ित मालती देवी (31) लंबी जद्दोहद के बाद आखिरकार 12 मार्च को मौत के आगे हार गई। उसे ये सौगात किसी और से नहीं बल्कि अपने पति नरंद्र प्रसाद से ही मिली थी। अव्वल दर्जे का पेंटर नरंद्र मुंबई से यह बीमारी साथ लाया था। करीब पांच साल पहले हीउसकी मौत हो गई थी। तभी से दो बेटों अंशू और अभिषेक को लायक बनाने की जिम्मेदारी मालती बाखूबी निभा रही थी, लेकिन उसकी मौत के बाद बच्चे यतीम हो गये। बच्चों के नाना मंगरु राम ने रोते हुए बताया कि पहले बाप और फिर मां की मौत के बाद अब इनका क्या होगा भविष्य, भगवान ही जाने?

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