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झारखंड के विधायक समय से पहले हो सकते है रिटायर

झारखंड विधानसभा को भंग करने के बारे में जारी अटकलों के बीच इस बात की प्रबल संभावना बन गई है कि राज्य में दूसरी विधानसभा अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाएगी। दो मार्च 2005 को अस्तित्व में आई विधानसभा को भंग करने की औपचारिक घोषणा हालांकि नहीं हुई है लेकिन कल रात खबरें आईं कि केंद्र सरकार ने विधानसभा भंग करने की सिफारिश कर दी है।
 
दूसरी विधानसभा के साढ़े चार वर्ष के कार्यकाल में राज्य ने चार मुख्यमंत्रियों के अलावा राष्ट्रपति शासन का दौर भी देखा। इस दौरान झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के शिबू सोरेन ने दो बार मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाली जबकि भाजपा के अर्जुन मुंडा भी राज्य मे मुख्यमंत्री बने। देश के पहले निर्दलीय मुख्यमंत्री मधु कोडा की सरकार के अल्पमत में आने के बाद इस साल जनवरी में राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाया गया। इस अवधि में विधानसभा में अध्यक्ष की कुर्सी पर दो विधायक इंदर सिंह नामधारी और आलमगीर आलम पहुंचे।
 
राज्य के कई विधायक इस दौरान अपने काम के बजाय दल-बदल, विवादों और भ्रष्टाचार के कारण सुर्खियों में रहे। पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा और उनके मंत्रिमंडल के तीन मंत्री कमलेश सिंह, बंधु तिर्की, भानु प्रताप शाही और चंद्र प्रकाश चौधरी अब भी बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण कानूनी पेंच में फंसे हुए हैं।
 
दूसरी ओर पूर्व मंत्री हरिनारायण राय और एनोस एक्का आय से अधिक संपत्ति के मामले में जेल जा चुके हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के चार विधायक स्टिंग आपरेशन में फंसने के कारण सुर्खियों में आए तो सात अन्य विधायकों दल बदल के कारण सदस्यता गंवानी पड़ी।

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