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सामंतवादी बन गया है बीसीसीआईः बेदी

पूर्व भारतीय कप्तान बिशन सिंह बेदी ने वेंकटेश प्रसाद और रोबिन सिंह को कोचिंग की उनकी जिम्मेदारियों से मुक्त करने के भारतीय क्रिकेट बोर्ड के तरीके की कड़ी आलोचना करते हुए शुक्रवार को कहा कि बीसीसीआई सामंतवादी बनता जा रहा है।

बेदी ने कहा कि बीसीसीआई का क्रिकेटरों के प्रति अच्छा रवैया नहीं है। उसने टीम के गेंदबाजी कोच और क्षेत्ररक्षण कोच को बिना कारण बताए निकाल दिया। यहां तक कि उसने इन दोनों के योगदान के लिए आभार जताना भी उचित नहीं समझा। इससे दिखता है कि बीसीसीआई का रवैया सामंतवादी है।

बोर्ड ने हाल में गेंदबाजी कोच वेंकटेश प्रसाद और क्षेत्ररक्षण कोच रोबिन सिंह को बर्खास्त करने की जानकारी केवल ई मेल से दी और इसका अभी तक कोई कारण नहीं बताया। बेदी ने शुक्रवार को वरिष्ठ खेल पत्रकार सी राजशेखर राव की किताब 'धोनी' के विमोचन के अवसर पर चैंपियंस लीग टवंटी 20 टूर्नामेंट ही नहीं बल्कि क्रिकेट के इस छोटे प्रारूप को भी आड़े हाथों लिया और इसके क्रिकेट के साथ मजाक करार दिया।

उन्होंने कहा कि यह बड़ा बेहूदा टूर्नामेंट है। मैं तो यह देखकर चौंक गया कि गेंदबाज ने दो ओवर किए हैं और उसमें आठ मेडन हैं। बाद में पता चला है कि वे डाटस बाल हैं। मुझे नहीं लगता कि इस तरह के खेल से क्रिकेट का विकास होगा।

बेदी कप्तानी पर चर्चा के दौरान धोनी को बलिदान का पाढ़ पढ़ाने से भी नहीं चूके लेकिन उन्होंने रिची बेनो के उस कथन पर हां में हां भी मिलाई जिसमें इस आस्ट्रेलियाई ने कहा था कि कप्तानी में 90 प्रतिशत भाग्य और दस प्रतिशत कौशल चलता है।

उन्होंने भारत में कप्तानी करने को मुश्किल करार देते हुए कहा कि कप्तान को कई चीजों को बलिदान करना होता है। धोनी को भी यह बात गांठ लेनी चाहिए। मेरा उनसे आग्रह है कि उस टीम पर ध्यान दें जो मैच जिता सके। इसके साथ ही मैं नहीं चाहता कि वह गेंदबाजी करें। उसके लिए अन्य क्रिकेटर हैं। उन्हें अपनी बल्लेबाजी और गेंदबाजी पर ध्यान देना चाहिए।

बेदी से जब पूछा गया कि भारत के दोनों विश्व कप विजेता कप्तानों कपिल देव (वनडे) और धोनी (टवंटी 20 विश्व कप टीम के कप्तान) में कौन सर्वश्रेष्ठ है तो उन्होंने कहा कि मैं तुलना नहीं कर सकता। दोनों ही बार हमारी टीम अंडरडाग थी लेकिन 1983 की जीत से किसी की तुलना नहीं की जा सकती। वह बहुत महत्वपूर्ण जीत थी और यह नहीं भूलना चाहिए तब वनडे 60-60 ओवर के होते थे।

सौरव गांगुली और धोनी की कप्तानी के बारे में उन्होंने कहा कि गांगुली लंबे समय तक कप्तान रहे जबकि धोनी ने इस भूमिका में अभी अधिक समय नहीं बिताया है। कुछ साल गुजरने के बाद इन दोनों की कप्तानी का तुलनात्मक अध्ययन किया जा सकता है।

इस अवसर पर पूर्व क्रिकेटर अजय जडेजा ने मंसूर अली खां पटौदी को भारत का सर्वश्रेष्ठ कप्तान करार दिया लेकिन साथ ही कहा कि उनके लिए वर्तमान दौर में कप्तानी करना मुश्किल होता।

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