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नहाय खाय के साथ पहाड़ों में छठ पर्व परवान चढा

पूरी दुनिया में सूर्य उपासना से जुड़े एक मात्र पर्व छठ का आयोजन पहाडी राज्य उत्तराखण्ड में नहाय खाय के साथ ही परवान चढ़ना शुरू हो गया और चार दिवसीय इस पर्व को पूरी श्रद्धा और विश्वास से हजारों लोग मनाते नजर आये।

उत्तराखण्ड की राजधानी देहरादून सहित विभिन्न जिलों में हजारों लोगों ने कल इस पर्व के पहले दिन नहाय खाय के साथ चार दिवसीय पूजा की शुरूआत की। लोगों ने पूरे दिन व्रत रख कर रोटी और खीर खाई तथा इसी रोटी और खीर को प्रसाद के रूप में वितरित भी किया।

पहाडी इलाकों में इस पर्व के अवसर पर लोग पूरे उत्साह के साथ जगह जगह छठी मइया के गीत गाते बजाते दिखाई दिये जिससे पूरा वातावरण छठमय हो गया।

लोगों ने कल अपने अपने इलाकों की नदी  पोखर-तालाब या किसी भी पानी के कुण्ड में डुबकी लगाकर भोजन ग्रहण किया। इसमें नये चावल का भात और लौकी की खीर थी।

छठ व्रतियों को मात्र एक समय ही भोजन ग्रहण करना होता है। इसी के चलते कल लोगों ने अपराहन में नहाने के बाद अपनी पवित्रता सुनिश्चित करते हुए भोजन ग्रहण किया था।

उत्तराखण्ड के विभिन्न जिलों में रहने वाले बिहार, झारखण्ड और पूर्वी उत्तरप्रदेश के लोगों दवारा मनाये जाने वाला यह छठ पर्व अब धीरे धीरे एक लोक पर्व बन गया है।

वेदों में अथर्ववेद में सूर्य पूजा का जिक्र आया है और इसी के चलते लोग कार्तिक शुक्लपक्ष की चतुर्थी से इस पूजा की शुरूआत कर देते हैं।

देहरादून में आयोजित छठ पूजा समिति के मुख्य कार्यकर्ता तथा बिहारी महासभा के अध्यक्ष सत्येन्द्र सिंह ने बताया कि मान्यता के अनुसार कार्तिक पंचमी को खरना का व्रत किया जाता है जो आज किया गया। इसमें व्रतधारियों की तपस्या की परीक्षा होती है। आज हजारों लोगों ने यह व्रत रखा।

सत्येन्द्र ने बताया कि छठ का त्यौहार किसी एक प्रदेश तक ही सीमित नहीं रहा बल्कि यह राष्ट्रीय स्तर पर मनाया जाने लगा है। उत्तराखण्ड में शायद ही कोई ऐसा जिला होगा जहां छठ पूजा के लिए तैयारी नहीं की गई हो। ऐसा नहीं कि केवल बिहार के मूल निवासी ही यह पर्व मनाते हैं। दरअसल उत्तराखण्ड के मूल निवासी पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ इस पर्व का आनन्द लेते हैं।

देहरादून के बल्लूपुर इलाके में आयोजित इस पर्व की संयोजिका प्रेमा चौहान ने बताया कि उत्तराखण्ड की भी कई महिलायें इस चार दिवसीय पर्व में हिस्सा ले रही हैं। महिलाओं ने कल नहाय खाय किया था और आज वे सभी खरना कर रही हैं।

उन्होंने कहा कि कल शनिवार को सभी व्रतधारी पूरे दिन निजर्ला व्रत रख कर अपराहन सूर्य को अर्घ्य देंगे।

उत्तराखण्ड के अल्मोडा, नैनीताल, बागेश्वर, रूद्रप्रयाग, टिहरी, उत्तरकाशी,  हरिद्वार तथा चमोली सहित अन्य जिलों में हजारों लोग पूरे उत्साह के साथ इस पर्व को मनाने में जुटे हैं।

देहरादून में ऐतिहासिक टपकेश्वर मंदिर के पास इस पर्व को मनाने के लिए विशाल शामियाना लगाया गया है। यहां सैकडों लोग अपने दैनिक सामान के साथ जुटे हुए हैं। लोगों ने कल टोंस नदी में स्नान कर नहाय खाय किया और आज पूरे दिन खरना भी किया।

इस अवसर पर विशेष रूप से गंगा में पानी की प्रचुरता को बनाये रखने के लिए हरिद्वार में हरकी पौडी के पास गंगा में 24 अक्तूबर को ही पानी छोडे जाने का उत्तरप्रदेश सरकार से अनुरोध किया गया है। गंगा की सफाई के लिए हर की पौडी के पास गंगा में पानी रोक दिया गया है और यदि 24 अक्तूबर तक पानी नहीं छोडा गया तो यह एक इतिहास होगा कि छठ के पर्व पर गंगा सूखी ही रही।

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