DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

दो टूक (23 अक्तूबर, 2009)

एनसीआर तक अपनी बाजुएं फैलाता दिल्ली महानगर ऊपर से भले अक्खड़ और नकचढ़ा लगता हो असल में इसका दिल मुलायम और मिजाज सबको साथ लेकर चलने वाला है। बहुभाषी, बहुधर्मी संस्कृतियों के रेशों से बुनी महीन रेशमी चादर। पूर्वाचल के चालीस लाख लोगों की छठ पूजा इस रंग-बिरंगे समाज को एक-दूसरे से जोड़ने वाला ऐसा ही धागा है।

पूरब के इस पावन पर्व को देश की राजधानी में मिला ऊंचा ओहदा पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के मेहनती और मिलनसार लोगों की उस पहचान का सम्मान भी है जिस पर उन्होंने महानगर के कंक्रीट से उड़ती धूल नहीं चढ़ने दी। हालांकि, भक्ति की इस गंगा में सियासत की कश्तियां भी लहरें उठाने लगी हैं पर इतना जरूर है कि मौजूदा नजारा बड़ा पावन और विभोर करने वाला है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:दो टूक (23 अक्तूबर, 2009)