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जीत के मायने

महंगाई और खेती की दिक्कतों के बावजूद तीन राज्यों के विधानसभा चुनावों की चैंपियन्स ट्रॉफी जीत कर कांग्रेस और उसके नेतृत्व में चल रहे यूपीए गठबंधन ने यह साबित कर दिया है कि मौजूदा स्थितियों में वही सबसे बेहतर राजनीतिक संगठन है। हालांकि जनता ने अपनी लोकतांत्रिक आस्था के चलते विपक्ष को पूरी तरह से खारिज भी नहीं किया है। अरुणाचल में प्रचंड बहुमत प्राप्त करते हुए महाराष्ट्र में हैट्रिक बनाना वास्तव में कांग्रेस और उसके सहयोगी दल एनसीपी के लिए बड़ी उपलब्धि है और उनके लिए खुशी मनाने के पर्याप्त कारण हैं। इससे कांग्रेस और एनसीपी गठबंधन को राज्य से केंद्र तक नए तरह की मजबूती भी मिली है।

कांग्रेस को जीत तो हरियाणा में भी मिली है और निर्दलीयों के सहयोग से इस राज्य में दूसरी बार उसकी सरकार बनने जा रही है। लेकिन हरियाणा की जीत में पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला की इंडियन नेशनल लोकदल ने उम्मीद से ज्यादा सेंघ लगाई है। पिछले विधानसभा के मुकाबले हरियाणा में कांग्रेस को करीब दो दजर्न सीटों के नुकसान के पीछे यहां विकास के असंतुलन को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। जहां जींद से रोहतक तक कांग्रेस को विजय मिली है, वहीं जींद से सिरसा तक पराजय। जाहिर है मुख्यमंत्री की विकास दृष्टि से असहमत दूसरे इलाके के ग्रामीण और जाट मतदाताओं ने कहीं अपनी नाराजगी व्यक्त की है। इसीलिए विभाजित विपक्ष का हरियाणा में कांग्रेस उतना लाभ नहीं उठा पाई, जितना वह ले सकती है। कांग्रेस को जनता के इस संदेश को समझते हुए विकास के असंतुलन को दूर करना चाहिए।
  
यूपीए को विपक्ष के विखराव का लाभ महाराष्ट्र में भी मिला है और इसीलिए वह अपनी पिछली स्थिति को बरकरार रखते हुए सरकार बनाने की हैट्रिक करने जा रहा है। कांग्रेस और एनसीपी की यह जीत बड़ी हो सकती थी, अगर बागी उम्मीदवार कम होते और तीसरा मोर्चा न बना होता। लेकिन इसी के साथ यह भी सही है कि अगर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना इस चुनाव में न होती तो यह जीत सिकुड़ भी सकती थी। उत्तर भारतीयों के विरोध के मुद्दे पर पहली बार विधानसभा चुनावों में शिरकत करने वाली राज ठाकरे की पार्टी ने शिवसेना और भाजपा गठबंधन को अच्छी तरह नुकसान पहुंचाया। लेकिन मनसे की यह जीत द्वेष पर आधारित है। उसे पुणे, नासिक और मुंबई जैसे उन्हीं जगहों पर कामयाबी मिली है, जहां उसने उत्तर भारतीयों पर हमले किए थे। ऐसे में कांग्रेस-एनसीपी की जीत की सार्थकता तभी बनेगी, जब मनसे की संकीर्णता पर लगाम लगे।

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