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स्पेक्ट्रम आवंटन: सीबीआई ने डाट के कार्यालय की तलाशी ली

स्पेक्ट्रम आवंटन: सीबीआई ने डाट के कार्यालय की तलाशी ली

सीबीआई ने कई नई कंपनियों को 2जी मोबाइल फोन सेवाओं के लिए रेडियो तरंगों के आवंटन में कथित अनियमितता के आरोपों के मद्देनजर गुरुवार को दूरसंचार मंत्रालय के कार्यालयों की तलाशी ली। आरोप है कि अधिकारियों ने निजी क्षेत्र की कंपनियों के साथ मिलकर स्पेक्ट्रम आवंटन में अनियमितता की, जिससे सरकार को करीब 22,000 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ है।

सीबीआई के दल ने गुरुवार सुबह स्पेक्ट्रम आवंटन के लिए जिम्मेदार विभाग वायरलेस प्लानिंग सेल (डब्ल्यूपीसी) तथा उप महानिदेशक (एक्सेस सेवा) के कार्यालयों की तलाशी ली। सीबीआई के इस तलाशी अभियान से दूरसंचार मंत्री ए राजा भी जांच के घेरे में आते दिख रहे है।

राजा ने कहा कि लाइसेंसों को 1994 में जारी किए गए दिशानिर्देशों के अनुरूप जारी किया गया है। मुझ से पहले के मंत्रियों ने भी इन्हीं दिशानिर्देशों का पालन किया है। सीबीआई के प्रवक्ता ने कहा कि इस तरह का आरोप है कि निजी कंपनियों को यूनिफाइड एक्सेस सर्विसेज लाइसेंस जारी करने में गंभीर अनियमितता बरती गई।
   
सीबीआई की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि प्राप्त सूचना के अनुसार दूरसंचार विभाग (डाट) के कुछ अधिकारियों तथा निजी व्यक्तियों एवं कंपनियों ने आपराधिक साजिश रची, जिससे इन कंपनियों को लाइसेंस देने के लिए ट्राई की सिफारिशों के विपरीत आवेदकों की सीमा निश्चित कर दी गई। इसमें कहा गया है कि निजी कंपनियों को पहले आओ पहले पाओ के आधार पर 2001 की दरों पर बिना प्रतिस्पर्धी बोली के लाइसेंस जारी कर दिए गए।

तलाशी से पहले सीबीआई ने डाट के कुछ अनाम अधिकारियों, निजी व्यक्तियों तथा कंपनियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धारा 120-बी (आपराधिक षडयंत्र) और 13 (आई-डी) के तहत मामला दायर किया था। सीबीआई प्रवक्ता ने कहा कि डब्ल्यूपीसी तथा उपमहानिदेशक (एक्सेस सेवाएं) के यहां संचार भवन स्थित कार्यालयों की तलाशी इस बारे में दस्तावेज तलाशने के लिए की गई।
   
दूरसंचार मंत्रालय पर यह आरोप लगा था कि उसने बाजार मूल्य से कम पर स्पेक्ट्रम का आवंटन किया है। सीवीसी ने इस मामले की सीबीआई जांच की सिफारिश की थी। 2008 में आठ नई कंपनियों को मोबाइल सेवा शुरू करने के लिए लाइसेंस के साथ 4.4 मेगाहटर्ज स्पेक्ट्रम का आवंटन किया गया था। दो नई कंपनियों यूनिटेक वायरलेस सर्विसेज तथा स्वान टेलीकाम द्वारा लाइसेंस मिलने के कुछ दिन बाद ही अपनी कुछ हिस्सेदारी बेच दी गई थी, जिससे इस प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे थे।
    
सरकार ने देशभर में सेवा प्रदान करने के लिए दिए गए लाइसेंस के साथ स्पेक्ट्रम का आवंटन 1,651 करोड़ रुपये में किया था। उस समय बाजर में मौजूद कंपनियों ने नई कंपनियों के प्रवेश का विरोध करते हुए कहा था कि रेडियो तरंगों की नीलामी बाजार में की जाए।

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