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माल्टे पर भी मौसम की मार

सूखे की मार सेब के साथ-साथ माल्टा व संतरे पर भी पड़ी है। समय पर बारिश न होने से इस बार माल्टे की फसल कम होने की आशंका जताई जा रही है।  चमोली जनपद में सिटरस प्रजाति के लगभग 42017 मैट्रिक टन संतरा, माल्टा, नींबू, गलगल, नारंगी का उत्पादन प्रतिवर्ष 5201 हेक्टेयर में होता है। जनपद में प्रति हेक्टेयर 8.07 मैट्रिक टन नींबू प्रजाति के फल उत्पादित होते हैं।

जिले के सभी 9 विकासखंडों में माल्टा व संतरे का उत्पादन होता है। विशेषकर दशोली, घाट, कर्णप्रयाग, गैरसैंण, नारायणबगड़, थराली व देवाल में संतरे, माल्टे अधिक होते हैं। परंतु इस बार समय पर वर्षा न होने से संतरा गिने-चुने ही पेड़ों पर दिख रहा है। बैरागना के माल्टा व्यापारी चंद्र सिंह कहते हैं कि इस बार पेड़ों पर फल विगत वर्षों की अपेक्षा बहुत कम हुए हैं।

जिला उद्यान अधिकारी एमएस धपोला ने कहा कि सूखे के कारण इस बार संतरा व माल्टा का उत्पादन कम हुआ है। एक अनुमान के अनुसार जनपद में इस समय केवल 11500 मैट्रिक टन माल्टा हुआ है। गढ़वाल मंडल विकास निगम को संतरों के विपणन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उद्यान विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार माल्टा के कलेक्शन सेंटर बनाये गए हैं। गढ़वाल मंडल विकास निगम काश्तकारों से प्राप्त माल्टा, संतरे, नींबू को बाजार में बेचता है।

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