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उम्र के फर्जी दस्तावेज दिखाकर 36 साल तक की नौकरी

जिस कॉलेज से पढ़ाई की, उसी में उम्र के फर्जी दस्तावेज दिखाकर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी बन गया। उस समय उसकी उम्र महज 13 साल थी। दस्तावेजों के सहारे उम्र में पांच साल की वृद्धि करने वाला यह व्यक्ति 36 साल से नौकरी कर रहा है। यही नहीं नाबालिक अवस्था में ही उसने चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी से प्रधान लिपिक का पद भी हासिल कर लिया था। यह आरोप है भवानी शंकर इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य नेत्रपाल सिंह का। उन्होंने इसकी शिकायत मंडलायुक्त, संयुक्त शिक्षा निदेशक, डीएम, एसएसपी व डीआईओएस से की है।

प्रधानाचार्य नेत्रपाल सिंह का आरोप है कि रामचन्द्र को सन् 1973 में सदरसराय कॉलेज के तत्कालीन प्रधानाचार्य शोभाराम शर्मा व कथित प्रबंधक द्वादसगिरि ने चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद पर अवैधानिक रूप से रख लिया था। इसके लिए उसने जाली दस्तावेज के जरिए अपनी उम्र पांच साल बढ़ाकर दर्शायी थी। 18 साल से कम उम्र में उसने प्रधानलिपिक का पद हासिल कर लिया। जब उन्हें इस बात की जानकारी हुई, तो उन्होंने रामचन्द्र की जन्मतिथि के संबंध में बेसिक शिक्षा अधिकारी के कार्यालय में 3 सितंबर 2009 को एक प्रार्थना पत्र जनसूचना अधिकार अधिनियम 2006 के अंतर्गत दाखिल किया। जिसमें उसकी जन्म तिथि का ब्यौरा मांगा गया। बीएसए ने सदरपुर स्थित प्राथमिक विद्यालय की प्रभारी अध्यापिका से इस बाबत जानकारी मांगी।

प्रभारी अध्यापिका के अनुसार रामचन्द्र की जन्म तिथि 5 जनवरी 1958 बताई गई। उसने कक्षा दो में 1 दिसंबर सन् 1965 में दाखिला लिया था। आरोप है कि कक्षा दो से पांच तक उसकी जन्मतिथि 5 जनवरी 1958 दर्शाई गई। इसके बाद उसने भवानी शंकर इंटर कॉलेज में कक्षा छह में दाखिला लेकर अपनी जन्मतिथि 1960 दिखाई। जिसको नेत्रपाल सिंह ने 30 सितंबर को विद्यालय प्रधानाचार्य के लैटरहैड पर सत्यापित किया कि रामचन्द्र ने कक्षा छह में अपनी जन्म तिथि 5 जनवरी 1960 दर्शाई है।

उन्होंने बताया कि दस्तावेजों में रामचन्द्र ने कक्षा दो से पांच तक 5 जनवरी 1958, कक्षा छह से नौ तक 1960 और कक्षा 10 से 12 तक अपनी जन्म तिथि पांच जनवरी 1955 दिखाई है। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद पर नियुक्ति के समय उसने अपनी जन्म तिथि पांच जनवरी 1955 दर्शाई थी, जो कि सर्विस बुक में भी है। कॉलेज के प्रधानाचार्य नेत्रपाल सिंह ने बताया कि उम्रसंबंधी दस्तावेज फर्जी साबित होने के चलते रामचन्द्र की नियुक्ति अवैध व शून्य साबित हो चुकी है।

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