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बड़े मौके निकले, छोटों को भुनाएगी अथॉरिटी

होटल स्कीम के विवाद में फंसने से राष्ट्रमंडल खेलों में मेहमानों का स्वागत करने का मौका गंवा चुकी अथॉरिटी, अब अपनी छवि बचाने के लिए अंतिम तैयारी में जुट गई है। सीधे तौर पर साइकिल इवेंट तक भूमिका सिमट जाने के बाद मेहमानों को शहर दिखाने के लिए अन्य रास्ते तलाश रही है। इनमें शहर की साफ-सफाई, ट्रैफिक, चौड़ी सड़कें, नालों का सौंदर्यीकरण, मार्केट को दुरुस्त करने, गांवों का विकास समेत कई योजनाओं को अमली जामा पहनाया जा रहा है।

तीन अक्तूबर से 14 अक्तूबर 2010 तक होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स की साइकिलिंग रेस प्रतियोगिता 6, 7, 10 व 14 अक्तूबर 2010 को होगी। साइकिलिंग रेस का रोड टाइम ट्रायल इवेंट 10 अक्तूबर को नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेस-वे पर होगा।

अथॉरिटी पुलिस प्रशासन के साथ मिलकर इस इवेंट से जुड़े संसाधनों को विकसित करने में जुटी है। अथॉरिटी मेहमानों को नोएडा दिखाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रही। होटल स्कीम में फंसने के बाद मेहमानों का स्वागत करने का मौका तो हाथ से निकल चुका है, साढ़े छह सौ करोड़ रुपए की लागत से बन रहा सेंट्रल पार्क भी कोर्ट विवाद में उलझ चुका है। शहर में निवेश को बढ़ावा देने के लिए एकवर्षीय योजनाएं लागू की जा रही हैं।

शिल्पोत्सव से बनेगी पहचान
जिस समय दिल्ली के खेलगांव में खेल चल रहे होंगे, उसी समय नोएडा में राष्ट्रीय शिल्प मेले की धूम रहेगी। पर्यटन विभाग व अथॉरिटी इसका ऐलान कर चुके हैं। इसी 30 अक्तूबर से लगने वाले मेले को रिहर्सल बता चुके अफसरों का मानना है कि इससे कॉमनवेल्थ के दर्शक नोएडा आएंगे।  

अलग दिखेगा पॉश मार्केट
पॉश मार्केट सेक्टर-18 दुरुस्त होगा। बिजली के तारों को अंडर ग्राउंड करने का काम मार्च तक पूरा करने का लक्ष्य है। कॉमनवेल्थ से पहले सभी दुकानों के बोर्ड का एक साइज व कलर करने की योजना है। भीड़-भाड़ से बचने के लिए रिक्शों पर पहले ही प्रतिबंध लग चुका है। यह व्यवस्था अट्टा मार्केट पर भी लागू होगी।

सुधरेगी ट्रैफिक व्यवस्था
शहर की यातायात प्रणाली को दुरुस्त करने के लिए नया ट्रैफिक प्लान लागू हो चुका है। टेम्पो व मेन रोड पर चलने से रिक्शों पर रोक लगाने के साथ ही अब सिटी बसों को दुरुस्त करने में अथॉरिटी जुट गई है। मेट्रो व 20 मिनी बसों के साथ ही अगले कुछ महीनों में 60 फीडर बसें चलाई जाएंगी।

सुधरेगी गांव की हालत
कॉमनवेल्थ से पहले नोएडा से जुड़े सभी 54 गांवों को आदर्श ग्राम बनाने का लक्ष्य है। इन गांवों में सामुदायिक केन्द्र, प्राथमिक स्कूल, पानी, सीवर व सड़कों को दुरुस्त करने की योजना है। इस पर काम शुरू हो चुका है। इसी वित्तीय वर्ष में सौ करोड़ रुपए खर्च होंगे।

बनेंगी छह पार्किंग
पार्किंग शहर की सबसे बड़ी समस्या है। सेक्टर-18 व गोल्फ कोर्स की मल्टीस्टोरी पार्किंग के अटकने के बाद अथॉरिटी अब पार्कों के नीचे पार्किंग बनाने पर जोर लगा रही है। आधा दर्जन पार्क चिन्हित हो चुके हैं। कॉमनवेल्थ से पहले इन पार्किंगों को मूर्त रूप देने का लक्ष्य है।

 

 

 

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