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चवन्नी की बढ़त पर 100 करोड़ की चपत

समय पर काम न करने का खामियाजा पावर कारपोरेशन को काफी महंगा पड़ने जा रहा है। प्रति यूनिट 25 पैसे की बढ़ोत्तरी से यूपीसीएल को कम से कम 100 करोड़ की चपत लगेगी। एआरआर में देरी न करने पर यह धनराशि कारपोरेशन की जेब में जा सकती थी। देरी की वजह से बढ़ी हुई दरें अप्रैल की बजाए अक्तूबर या नवंबर से लागू होंगी। उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग सोमवार को प्रदेश में बिजली की नई दरों की घोषणा करेगा। एनुअल रिवेन्यू रिक्वायरमेंट (एआरआर) रिपोर्ट समय पर जमा न करने पर आयोग ने जल विद्युत निगम व पिटकुल पर पैनल्टीलगाई है।

लेकिन उत्तराखंड पावर कारपोरेशन को पैनल्टी न लगने पर भी करोड़ों का नुकसान ङोलना पड़ सकता है। इस वर्ष बिजली की दरों में बढ़ोत्तरी होना लगभग तय माना जा रहा है। प्रदेश में प्रतिमाह औसतन 60 करोड़ यूनिट बिजली की खपत होती है। यदि एक यूनिट में 25 पैसे प्रति यूनिट की भी बढ़ोत्तरी होती है तो एक महीने में 15 करोड़ रुपए का अंतर पड़ेगा। समय पर एआरआर जमा करने पर बिजली की दरें अप्रैल से लागू होती लेकिन अब इसमें सात महीने की देरी हो चुकी है।

इस तरह सात महीने में उत्तराखंड पावर कारपोरेशन को लगभग 105 करोड़ रुपए का नुकसान होगा।
 बिजली की दरों में और अधिक बढ़ोत्तरी होने से यह धनराशि बढ़ सकती है। महंगी बिजली खरीदने की वजह से यूपीसीएल लगातार अपनी कमजोर आर्थिक स्थिति का रोना रो रहा है। समय पर एआरआर जमा होने से कारपोरेशन को लगभग 100 करोड़ का फायदा हो सकता था।

प्रदेश में लगभग 11 लाख घरेलू उपभोक्ता हैं, जो प्रतिमाह 20 करोड़ यूनिट बिजली उपयोग करते हैं। जबकि लगभग 10 हजार औद्योगिक उपभोक्ता 30 करोड़ यूनिट से अधिक बिजली की खपत करते हैं। ऐसे में औद्योगिक उपभोक्ताओं में बढ़ोत्तरी का असर यूपीसीएल को अधिक पड़ेगा।

उत्तराखंड पावर कारपोरेशन के प्रबंध निदेशक जगमोहन लाल पिछले वर्ष हुई देरी को मानते हैं। आगामी वित्तीय वर्ष के लिए कारपोरेशन ने तैयारी शुरू कर दी है। 2010-11 के लिए यूपीसीएल ने 30 नवंबर तक विद्युत नियामक आयोग के पास एआरआर जमा करनी है।

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