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छोड़नी होगी उठापटक की सियासत : खंडूड़ी

पूर्व मुख्यमंत्री बी सी खंडूड़ी का मानना है कि अभी भी राज्य राजनीतिक दृष्टिकोण से परिपक्व नहीं हो पाया। प्रदेश के स्थापना दिवस (नौ नवम्बर) पर शीर्ष नेतृत्व को एक नए संकल्प के साथ नयी उड़ान भरनी होगी।
‘हिन्दुस्तान’ से बातचीत में पूर्व मुख्यमंत्री ने बीते नौ साल की कमियों व अच्छाइयों पर खुल कर अपना पक्ष रखा। यह भी माना कि राजनीतिक क्षेत्र में जारी उठापटक से विकास की प्राथमिकताएं काफी पीछे छूट गयी। प्रदेश गठन के साथ ही प्रमुख अलम्बरदार दलीय अंतर्कलह में उलङो।

  अंतरिम सरकार में दो-दो मुख्यमंत्री बने। कांग्रेस के 5 साल व उनके ढाई साल में उथल पुथल थमी नहीं। लेकिन स्थापना दिवस में प्रत्येक दल को इस राजनीतिक बीमारी को जड़ से उखाड़ने के लिए सामूहिक प्रयत्न करने चाहिए। पूर्व मुख्यमंत्री का कहना है कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो कभी भी मुट्ठी भर विधायक सरकार को परेशानी में डाल सकते हैं। जनरल खंडूड़ी ने कांग्रेस पर भी तल्ख टिप्पणी की। कहा, कांग्रेस का राज्य गठन के प्रति कोई कमिटमेंट नहीं था। लिहाजा आंदोलनकारियों के सपनों को पूरा करना भी उनकी एजेंडे में शामिल नहीं हो पाया। 

खंडूड़ी कहते हैं कि राजनीतिक झगड़े के चलते नेतृत्व जनता को भ्रष्टाचार मुक्त शासन देने में सफल नहीं हो पाया। पूर्व मुख्यमंत्री का कहना है कि उनके शासन में भ्रष्टाचार उन्मूलन, भर्ती प्रक्रिया, विकास व रोजगार के मुद्दे पर कई ठोस फैसले हुए।प्रशासनिक प्रणाली को सुधारने की भी कवायद हुई। भ्रष्टाचार के खुलासे के लिए जांच आयोग का गठन किया। इसके परिणाम अब मिल रहे हैं। इस वक्त हम सही दिशा पकड़ लेंगे तो राज्य की दशा भी सुधर जाएगी। वर्तमान नेतृत्व इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है।

बी सी खंडूड़ी का मानना है कि वह घोषणा करने में कंजूस साबित हुए हैं। हालांकि, घोषणाओं के मामले में जनता के मन में राजनेताओं के प्रति अविश्वास की भावना है। चुनाव व राजनीतिक दबाव में कई असंभव घोषणाएं भी कर दी जाती रही है। खंडूड़ी का कहना है कि अपने कार्यकाल में जितनी भी घोषणाएं की गयी, उनके शासानादेश भी जारी किए गए। खंडूड़ी कहते हैं कि कांग्रेस के शासन में सिर्फ मैदानी इलाकों में औद्योगिक इकाइयों की स्थापना के क्षेत्र में कुछ कदम उठाए गए। लेकिन पर्वतीय क्षेत्र में उद्योग नहीं लगे।  इसी दौरान भ्रष्टाचार के भी की मामले सामने आए। पूर्व मुख्यमंत्री का कहना उनकी मुख्य चिंता मंजिल तक पहुंचने की है। इस पुण्य कार्य में जनता की सहभागिता निश्चित तौर पर फलदायी साबित होगी। साथ ही जनप्रतिनिधियों को अपने आचरण से एक उदाहरण पेश करना चाहिए।

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