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मार्क्स को मिली वेटिकन की स्वीकृति

मार्क्स को मिली वेटिकन की स्वीकृति

धर्म को जनता का अफीम कहने वाले कार्ल मार्क्स को इस भयानक आर्थिक मंदी के मद्देनजर अब वेटिकन ने सदी भर की शत्रुता खत्म करते हुए स्वीकृति दे दी है। द टाईम्स न्यूजपेपर ने गुरुवार को कहा मार्क्स ने कहा था कि पूंजीवाद अपने आंतरिक विरोधाभासों से ही खत्म हो जाएगा-अब वह गेलीलियो, चार्ल्स डार्विन और आस्कर वाईल्ड जैसे ऐतिहासिक व्यक्तित्वों की कतार में शामिल हो गए हैं जिनकी रोमन कैथोलिक चर्च ने प्रशंसा की है।
   
ब्रिटेन के अखबार ने वेटिकन अखबार लआसरवेतोर रोमानो के हवाले कहा कि मार्क्स की पूंजीवाद की शुरूआती आलोचनाओं में उस सामाजिक अलगाव का जिक्र किया गया था कि जो मानवता का बड़ा हिस्सा महसूस करता है। यह हिस्सा आर्थिक और राजनीतिक निर्णय प्रक्रिया से बाहर रहता है।
    
वैश्विक वित्तीय बाजारों में सुधार के संकेतों के बीच ईसाई नेतृत्व ने पूंजीवाद प्रणाली की नैतिक गुणों के अभाव को जहिर करने की आलोचना और कहा कि नैतिक बहस को ज्यादा तरजीह देने की जरूरत है। ग्रेगोरियन विश्वविद्यालय में समसामयिक दर्शन के इतिहास के प्रोफेसर जर्ज सान्स ने कहा कि मार्क्स के सिद्धांत विशेष तौर पर आज ज्यादा प्रासंगिक हैं क्योंकि लोग अपनी जरूरत और प्राकतिक पर्यावरण के बीच नया संबंध तलाश रहे हैं।

 

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