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..तो ट्रेन दुर्घटनाओं पर लग जाता ब्रेक

देश में बढ़ते रेल हादसों पर अंकुश लगाने के लिए महत्वकांक्षी योजना ठिठककर रह गई। केंद्रीय रेल मंत्री नीतीश कुमार के कार्यकाल में प्रस्तावित की गई महत्वकांक्षी योजना परवान चढ़ गई होती तो देशभर में ट्रैक पर दौड़ने वाली ट्रेनों में एंटी कॉलीजन डिवाइस लगने के साथ ही रेल हादसों पर ब्रेक लग गया होता। रेलवे अफसर कहते है कि यदि ट्रेनों में प्रस्तावित डिवाइस सिस्टम को लगा दिया जाए तो हर साल ट्रेन दुर्घटना में अरबों-खरबों रुपये की नष्ट होने वाली संपत्ति के साथ ही जन हानि को बचाया जा सकता है।

मथुरा में दो ट्रेनों में हुई भिड़त की घटना के बाद रेलवे अफसरों को रेल मंत्री रहे नीतीश कुमार के कार्यकाल में तैयार हुई ट्रेनों में एंटी कॉलीजन डिवाइस लगाई जानी थी। प्रत्येक ट्रेन पर सिस्टम लगाने में करीब दो लाख रुपये खर्च होना था। एंटी कॉलीजन डिवाइस लगने के बाद ट्रेनों में भिड़त की घटनाएं एकदम शून्य हो जाती। रेलवे अफसरों के मुताबिक इस डिवाइस के लगने के बाद यदि दो ट्रेन आमने-सामने अथवा एक ही ट्रैक पर आगे-पीछे आने की स्थिति में निर्धारित दूरी पर रूक जाती।

इसके साथ ही सिग्नल सिस्टम फेल होने अथवा चालक की लापरवाही की स्थिति में होने वाले ट्रेन हादसों पर अंकुश लगाने के लिए बजर सिस्टम ट्रेनों में लगाया जाना था। इसकी फ्रिकवेंसी सिग्नल सिस्टम से कनेक्ट की जानी थी। यह सिस्टम भी परवान चढ़ने से पहले ही दम तोड़ गया। इस डिवाइस के लगने के बाद यदि चालक सिग्लन को पार कर निकल जाता तो 15 सेकेंड तक लगातार पहले बजर बजता, फिर सेट की फ्रिवेंसी के मुताबिक ट्रेन सिग्नल क्रास करने पर कुछ दूरी पर रूक जाती।

इसी तरह ट्रेनों, मालगाड़ियों में ब्रेक लाइट सिस्टम भी नहीं लग पाया। रेलवे अफसरों का मानना है कि यदि इन डिवाइस को रेल मंत्रलय ट्रेनों में लगा दे तो हादसों पर ब्रेक लग सकता है। सूत्रों की माने तो नीतीश कुमार के कार्यकाल में इस महत्वकांक्षी योजना को बजट के अभाव में परवान नहीं चढ़ाया जा सकता था।

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