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यूपीटीयू सरकार की कठपुतली-वीसी

‘शिक्षकों की गुणवत्ता का पता छात्रों को पढ़ाने के एक साल बाद चलता है। शुरुआत में मानकों के अनुसार ही टीचर होते हैं। सेशन में खाली सीटें छात्र व कॉलेजों के बीच गुणवत्ता में टकराव का नतीजा है। इसमें यूपीटीयू कुछ नहीं कर सकती। नए कॉलेजों पर रोक संभव नहीं है। हमारे पास तो सरकार से हस्ताक्षरित पत्र आते हैं। ऐसे में जो आदेश हुआ, पालन करते हैं।’ कुकुरमुत्तों की तरह उगे तकनीकी-प्रबंधन कॉलेजों पर यूपीटीयू का कोई अंकुश नहीं होने की यह पुष्टि वीसी प्रो. कृपा शंकर ने प्रेसवार्ता में कर दी।

आईआईएमटी में वीसी ने कॉलेजों में गुणवत्ता को लेकर यूपीटीयू के हस्तक्षेप और अधिकार से साफ इंकार कर दिया। प्रो. कृपा शंकर के अनुसार गुणवत्ता को नापने का पैमाना क्या है। जब कॉलेज खोला जाता है तो सब ठीक होता है। टीचर सही हैं अथवा नहीं, इसका पता एक साल बाद चलता है। ऐसे में यूपीटीयू क्या कर सकती है। कॉलेजों की लगातार संख्या बढ़ने और सीटें खाली रहने पर भी वीसी ने यूपीटीयू को असमर्थ बताया। वीसी ने यूपीटीयू को दो भागों में बांटने पर भी विरोध जताया।

हालांकि उन्होंने दिसंबर से नोएडा सहित प्रदेश के दो केंद्रों पर बीटेक व एमटेक शिक्षकों को तैयार करने के लिए विशेष कोर्स शुरू करने की घोषणा की। वीसी के अनुसार इन केंद्रों पर भविष्य की जरुरतों के मुताबिक ट्रेंड टीचर तैयार होंगे। ट्रेनिंग वर्ष भर चलेगी और यह से निकले छात्र सीधे कॉलेजों में नियुक्त हो सकेंगे। उन्होंने खाली सीटें रहने पर कॉलेजों के ऑफर सिस्टम को भी सही माना।

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