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दो नए निजी विवि पर ग्रहण

बरेली और मथुरा के प्रस्तावित दो निजी विश्वविद्यालयों के विधेयक पर ग्रहण लग गया है। विधानमंडल के बीते सत्र में पारित सभी विधेयकों को राजभवन ने हरी झंडी दे दी लेकिन यह दोनों विधेयक डेढ़ महीने से अधिक वक्त से रुके हुए हैं। इन पर  राजभवन में मंथन जारी है।

विधानमंडल के बीते सत्र के खत्म होने के अंतिम दिनों में राज्य सरकार बरेली के इन्वर्टिस विश्वविद्यालय और मथुरा के जीएलए विश्वविद्यालय का विधेयक लाई थी। बरेली के प्रस्तावित इन्वर्टिस विश्वविद्यालय का संचालन उत्तरांचल वेल्फेयर सोसइटी करेगी जबकि मथुरा में जीएलए विश्वविद्यालय की नींव जगन्नाथ प्रसाद गनेशीलाल बजाज चेरिटेबिल ट्रस्ट को रखनी है।

राजकीय विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति खुद राज्यपाल होते हैं लेकिन इन दोनों विश्वविद्यालयों में तीन साल के लिए कुलाधिपति का चयन विवि की प्रबंध समिति को करना है। इन विश्वविद्यालयों में कुलाधिपति के नीचे प्रति-कुलाधिपति और उसके बाद कुलपति होगा। प्रति-कुलाधिपति की नियुक्ति प्रबंध समिति कुलाधिपति के परामर्श से करेगी जबकि कुलपति की नियुक्ति सीधे कुलाधिपति करेंगे।

सूत्रों के मुताबिक दोनों विधेयक हड़बड़ी में लाए गए। कैबिनेट बाई सकुर्लेशन के जरिए इनका प्रस्ताव अनुमोदित हुआ और विधानमंडल से पारित होने के बाद अगस्त के दूसरे हफ्ते में यह दोनों विधेयक मंजूरी के लिए राजभवन भेजे गए थे। तब से ये दोनों विधेयक राजभवन में विचाराधीन हैं।

सूत्र बताते हैं कि नए राज्यपाल बीएल जोशी के सामने पहली बार निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना के विधेयक आए हैं। निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना को लेकर राजभवन इस बार ज्यादा सतर्कता बरत रहा है। विधेयक की एक-एक धारा का बारीकी से अध्ययन किया जा रहा है।

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