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बच्चे गैर हाजिर तो मां-बाप नहीं दे सकेंगे वोट


दो संतानों के मात-पिता एक ही स्कूल की शिक्षा समिति के लिए वोट कर सकते हैं। वोट देने का हक भी तभी मिलेगा जब उनके बच्चे की उपस्थिति 60 प्रतिशत से कम न हो। शिक्षा समितियों के चुनाव के लिए विभाग ने राज्य निर्वाचन पा्रधिकार को जो नियमावली सौंपी है उसमें यही प्रावधान किया गया है।

विभाग ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अगर किसी माता-पिता के दो संतान एक ही पोषक क्षेत्र में पड़ने वाले दो अलग-अलग स्कूलों में पढ़ते हों तब भी वे किसी एक ही स्कूल की शिक्षा समिति के वोटर हो सकेंगे। ऐसा नहीं होगा कि एक स्कूल के वोटर लिस्ट में माता का नाम और दूसरे में पिता का नाम जोड़ा जाएगा।

उन्हें यह छूट दी जाएगी कि वे दोनों में से किसी एक स्कूल का चयन अपनी मर्जी से करें। एक बार विकल्प तय कर लेने के बाद उसे वे तब तक बदल नहीं सकते जब तक उनका बच्चा उस स्कूल का छात्र रहेगा।

नियमावली में यह प्रावधान भी किया गया है कि  जिनके बच्चों की हाजिरी 60 प्रतिशत से कम होगी उन्हें विद्यालय समितियों में जगह नहीं मिल सकेगी। समितियों के चुनाव के लिए बनने वाले वोटर लिस्ट से भी उनका नाम हटा दिया जाएगा। मतलब साफ है कॉलेजों में चाहे जो व्यवस्था हो लेकिन स्कूलों में बच्चाे की हाजिरी कम होने पर ‘सजा’ अभिभावकों को मिलेगी।

सरकार ने स्कूलों में छात्रों की उपस्थिति बढ़ाने के लिए यह नया फामरूला तय किया है। नये फामरूले में इसकी जवाबदेही अभिभावकों पर डाल दी है। नियमावली के अनुसार वैसे बच्चों के अभिभावकों को थोड़ी छूट दी जाएगी जो पहले छुट्टी स्वीकृत करा कर विद्यालय से अनुपस्थित रहे हों। ऐसी स्थिति में अनुपस्थिति का कारण विद्यालय के प्रधान को स्वीकार्य होना चाहिए।

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