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आजमगढ़ में जनसहयोग से हो रहा पुल का निर्माण

अगर मनुष्य के अंदर दृढ़ इच्छा शक्ति, आत्मविश्वास, सच्ची लगन, कठिन परिश्रम व पक्का इरादा हो तो वह दुनिया का हर बड़ा से बड़ा कार्य कर सकता है। इसकी जीती-जागती मिसाल शिवराजपुर गांव में देखने को मिली। जिस कार्य को विधायक, सांसद, मंत्री नहीं कर पाये उसे ग्रामीणों ने जनसहयोग से कर दिखाया। तमसा नदी के शिवराजपुर-न्याउज मार्ग पर जनसहयोग से लाखों रुपये कीमत से बनने वाले पुल के पांच पावे बनकर तैयार हैं।

नदी में पानी कम होते ही छत का कार्य शुरू हो जायेगा। लाखों रुपये खर्च के बावजूद ग्रामीणों के हौसले बुलन्द हैं।
तहबरपुर विकास खण्ड में पड़ने वाले शिवराजपुर गांव में मुख्यतया मुस्लिम, यादव व चमार जाति के लोग निवास करते हैं। मुस्लिम समाज के लोग मुम्बई, गुजरात व विदेशों में रहे हैं, जिनका वहां अच्छा कारोबार है। जब कभी वह परदेश से अपने गांव वापस आते थे, सब साधन सम्पन्न होने के बावजूद पैदल आना पड़ता था।

साथ ही बरसात के दिनों में जब परिवार के साथ नौका में बैठते थे तो उनकी रूह कांप जाती थी। उनके अंदर एक पीड़ा थी, जिसे लेकर वह पूर्व मुख्यमंत्री रामनरेश यादव, तत्कालीन सांसद दरोगा प्रसाद सरोज, अकबर अहमद डम्पी, विधायक दुर्गा प्रसाद यादव से पुल बनवाने की फरियाद की, पर सभी कोरा आश्वासन देते रहे। फिर भी ग्रामीणों ने हार नहीं मानी और आपस में पुल बनाने की कवायद शुरू कर दी।

कौन जानता था कि, जनप्रतिनिधियों का नकारापन यहां तक पहुंचा देगा। मुम्बई गोदी से सेवानिवृत्त हाजी अख्तर साहब ने पुल की पहल की, जिसे ग्रामीणों ने एक स्वर से कबूल किया। आज के लगभग तीन साल पूर्व पुल का शिलान्यास सरायमीर थाने के कवरे गांव निवासी 80 वर्षीय शेख हाजी इजहारुल ने किया, जिनका गुजरात में अच्छा-खासा कारोबार है। उन्होंने पुल की छत, एप्रोच, रेलिंग बनवाने का वादा किया। हाजी अख्तर ने बताया कि, 17 हजार रुपये लेकर पुल निर्माण कार्य शुरू किया गया था। भय लगता था। किन्तु ज्यों-ज्यों एक-एक ईंट पड़ती गयी, त्यों-त्यों हौसले बुलन्द होते गये और जकातदाताओं की लम्बी फेहरिस्त हो गयी।

पुल निर्माण में अब तक लगभग 50 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। सामने धन की जरूरत है, फिर भी हम लोगों के उत्साह में कमी नहीं है। हौसले बुलन्द हैं। उन्होंने बताया कि, छत, एप्रोच व रेलिंग निर्माण की सामग्री गिराने के लिए शेख हाजी इजहारुल का बार-बार फोन आ रहा है, लेकि न नदी पर सामान की सुरक्षा कौन करेगा। नदी का जलस्तर कम होते ही दिसम्बर माह से पुल निर्माण का कार्य शुरू हो जायेगा और गर्मी में पुल बनकर तैयार हो जायेगा।

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  • Web Title:आजमगढ़ में जनसहयोग से हो रहा पुल का निर्माण