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लगातार फीका पड़ता भगवा का असर

लगातार फीका पड़ता भगवा का असर

इस साल लोकसभा चुनाव से शुरू हुआ हार का सिलसिला भाजपा के लिए थमने का नाम नहीं ले रहा है और महाराष्ट्र, हरियाणा तथा अरुणाचल प्रदेश के विधानसभा चुनावों में भी भगवा पार्टी को मुंह की खानी पड़ी है।

इनेलोद से नाता तोड़ने और भजन लाल की पार्टी हरियाणा जनहित कांग्रेस के साथ गठजोड़ नहीं होने से हरियाणा में भाजपा को ज्यादा उम्मीद नहीं थी लेकिन महाराष्ट्र में उसे भारी झटका लगा है और उसे लगातार तीसरी बार पराजय का मुंह देखना पड़ा है।

पारंपरिक साझेदार शिवसेना के साथ मिलकर भाजपा ने लोकसभा चुनाव की हार के बाद खोई जमीन पर काबिज होने की कोशिश की थी लेकिन कांग्रेस-राकांपा गठजोड़ के आगे उसका गठबंधन टिक नहीं पाया। राज ठाकरे की मनसे ने शिवसेना के वोट बैंक में सेंध लगाई, जिसका सीधा फायदा कांग्रेस-राकांपा को हुआ। भाजपा प्रवक्ता रवि शंकर प्रसाद ने स्वीकार किया कि मनसे ने 40 से अधिक सीटों पर गठजोड़ का नुकसान किया है। उन्होंने कहा कि इससे जीत और हार का अंतर बढ़ गया है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि पार्टी में कुछ कमियां हैं, जिन्हें दूर करने के लिए ईमानदारी से आत्मावलोकन किया जाएगा।

महाराष्ट्र में भाजपा के शीर्ष नेता गोपीनाथ मुंडे ने कहा कि पार्टी का मनोबल बढ़ाने की सख्त आवश्यकता थी लेकिन राज्य के चुनावी नतीजे तो मनोबल गिराने वाले हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी को युवा नेतृत्व की आवश्यकता है। उनके इस तर्क को पार्टी में और लोगों का समर्थन मिलने की भी उम्मीद है।

मुंडे ने कहा कि यदि हम जीतते तो राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी पर काफी असर होता लेकिन हम हार गए। पार्टी का मनोबल बढ़ाने की जरूरत है और युवा नेतृत्व भी जरूरी है।

प्रसाद ने कहा कि हम अपनी कमजोरियों के बारे में सोचेंगे। ईमानदारी से कारणों का विश्लेषण करेंगे। हमें इन मुद्दों का हल करना ही होगा। पार्टी के खराब प्रदर्शन के लिए अंतर्कलह को एक वजह मानने का संकेत देते हुए उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हमें एक सुर में बोलना चाहिए।

अध्यक्ष राजनाथ सिंह का कार्यकाल दिसंबर में समाप्त होने वाला है। ऐसे में इस हार से लालकृष्ण आडवाणी जैसे वरिष्ठ नेता पर भी लोकसभा के विपक्ष का नेता पद छोड़ने का दबाव बनेगा। आडवाणी को विपक्ष के नेता पद के रूप में अपने उत्तराधिकारी का चयन करने के लिए कह चुके राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा भाजपा के मामलों में अब और महत्वपूर्ण भूमिका निभाए जाने की उम्मीद बढ़ी है।

पार्टी सूत्रों ने कहा कि इससे आडवाणी पर सक्रिय राजनीति से संन्यास लेने का और दबाव पड़ सकता है। भाजपा-शिवसेना के किले में सेंध लगाने वाली राज ठाकरे के नेतृत्व वाली मनसे को भावी गठजोड़ साझेदार बनाने के बारे में भी सोच पनप सकती है। मुंडे ने कहा कि पांच से छह प्रतिशत वोट लेकर मनसे 13 सीटें जीतती नजर आ रही है। कुल मिलाकर ये सभी हमारे वोट हैं।

हरियाणा में ओम प्रकाश चौटाला की इनेलोद से नाता तोड़ना भाजपा के लिए भारी पड़ा। चौटाला हालांकि गठजोड़ के काफी इच्छुक थे लेकिन भाजपा का एक वर्ग महसूस करता था कि लोकसभा चुनाव में गठजोड़ द्वारा एक भी सीट नहीं जीत पाने के कारण अब भाजपा और इनेलोद के बीच गठजोड़ का कोई औचित्य नहीं है।

भाजपा के एक नेता ने कहा कि इनेलोद ने हरियाणा विधानसभा चुनाव में 31 सीटें जीती हैं। यदि गठजोड़ जारी रहता तो हमें भी काफी फायदा होता। भाजपा के हरियाणा मामलों के प्रभारी विजय गोयल ने कहा कि गठजोड़ से बेहतर परिणाम आते, यह चर्चा अब बेमानी है लेकिन उन्होंने कहा कि कांग्रेस को विपक्षी खेमे में भ्रम की स्थिति का फायदा मिला है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस को विपक्षी दलों के वोटों में विभाजन का फायदा मिला है। यदि ये पार्टियां मिलकर चुनाव लड़तीं तो कांग्रेस को हम पराजित कर सकते थे। भाजपा मंहगाई, भ्रष्टाचार, आतंकवाद और कांग्रेस के कुशासन जैसे मुद्दों को मतदाताओं के बीच भुना पाने में विफल रही।

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