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सेक्स से इंकार पर 9 फीसदी बांग्लादेशी महिलाएं होती हैं प्रताड़ित

सेक्स से इंकार पर 9 फीसदी बांग्लादेशी महिलाएं होती हैं प्रताड़ित

बांग्लादेश की 36 प्रतिशत महिलाओं का मानना है कि अगर महिलाएं बड़ों की इज्जत न करें, बिना इजाजत घर से बाहर जाएं या बच्चों की परवाह न करें तो उन्हें पतियों द्वारा पीटा जाना जायज है।

एक सरकारी सर्वेक्षण के मुताबिक देश की 46 प्रतिशत महिलाएं अपने पतियों से पिटती हैं।

इनमें से नौ प्रतिशत महिलाएं केवल इसलिए पिटती हैं क्योंकि इच्छा न होने पर वह यौन संबंध बनाने से इंकार कर देती हैं। पांचवें ‘बांग्लादेश डेमोग्राफिक एंड हेल्थ सर्वे’ (बीडीएसएस) 2007 के मुताबिक इन नौ प्रतिशत महिलाओं का मानना है कि यौन सबंध बनाने से इंकार करने पर पुरुषों का महिलाओं को पीटना सही है।

सर्वेक्षण में चार प्रतिशत पुरुषों ने यौन संबंध बनाने से मना करने पर पत्नियों को पीटे जाने की वकालत की है। जबकि 18 प्रतिशत महिलाओं पर उनकी इच्छा न होने पर भी उनके पतियों द्वारा यौन संबंध बनाने के लिए दबाव बनाया जाता है।

बांग्लादेश के अन्य इलाकों में रहने वाली महिलाओं की अपेक्षा चटगांव और सिलहट की कामकाजी महिलाएं कम शारीरिक प्रताड़ना झेलती हैं। एक ऐसे समाज में जहां संयुक्त परिवार में रहना आदर्श माना जाता है और जहां दो-तीन पीढ़ियां साथ रहती हैं वहां पत्नियों का सास-ससुर की बात न मानना या उनकी अवहेलना करना पति-पत्नी के बीच झगड़े का मुख्य कारण होता है।

सर्वेक्षण के मुताबिक कुल 36 प्रतिशत महिलाओं का विश्वास है कि इनमें से किसी भी कारण से पतियों का पत्नियों पर हिंसा करना सही है। 24 प्रतिशत महिलाओं का मानना है कि बड़ों की आज्ञा न मानने पर पतियों द्वारा पत्नियों को पीटना सही है। जबकि 22 प्रतिशत महिलाएं मानती हैं कि पतियों से बहस करने पर, 18 प्रतिशत महिलाएं पतियों को बिना बताए बाहर जाने पर और 16 प्रतिशत बच्चों पर ध्यान न देने पर, पतियों का पत्नी को प्रताड़ित करना सही मानती हैं।

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