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4 बजकर 58 मिनट पर ठिठक गया वक्त

4 बजकर 58 मिनट पर ठिठक गया वक्त

सुबह मथुरा स्टेशन पर गोवा एक्सप्रेस कुछ आगे चली थी कि एक जोरदार झटके के साथ मेरी आंख खुली और ऊपर की बर्थ से मैं लगभग गिरने की हालत में था। झांक कर देख तो पूरी बोगी में अफरातफरी और कोलाहल मचा हुआ था। मैंने देखा कि लोग जोर से चिल्ला रहे हैं और ट्रेन से बाहर निकलने के लिए भाग रहे हैं। एक मिनट तो मैं भी नहीं समझ सका कि माजरा क्या है।

घड़ी देखी तो उसमें चार बजकर 58 मिनट हो रहे थे। मैं तेजी से अपनी सीट से नीचे आया और बोगी की लाइट जलाई और तेजी से बाहर भागा क्योंकि मुङो लगा कि शायद ट्रेन पटरी से उतर गई है।

इस बीच मेरे सामने पेंट्री कार का एक कर्मचारी बदहवाश हालत में भागता दिखाई दिया उससे मैंने पूछा कि आखिर क्या हो गया है। वह रोते हुए बोला कि हमारे कुछ आदमी पेंट्री कार के फट जाने से उसमें फंस गए हैं। वहां पहुंच कर देखा तो हालत बहुत बुरे थे क्योंकि पेंट्री कार का आगे का हिस्सा बुरी तरह फट गया था। मैंने हिम्मत करके पेंट्री कार पर चढ़कर देखने की कोशिश की।

तकरीबन सुबह के पांच बजे होने के कारण काफी अंधेरा था तो मैंने अपने मोबाइल की रोशनी में उस हिस्से में झांका और वहां का नजारा देखकर मेरे होश फाख्ता हो गए क्योंकि एक व्यक्ति उसमें बुरी तरह फंसा हुआ था और देखने से यह पता नहीं चल रहा था कि वह जिंदा है या...।

यह तो शुक्र था कि इस दौरान पेन्ट्री कार में गैस के सिलेंडर नहीं फटे, नहीं तो यह हादसा बहुत बड़ा हो सकता था। क्योंकि दोनों गाड़ी साथ में लगी हुई थी और दीपावली के त्यौहार के चलते बड़ी संख्या में दिल्ली में काम करने वाले लोग  अपने घरों से वापस दिल्ली की ओर जा रहे थे। इस दुर्घटना की तस्वीर मेरे जेहन से निकाले नहीं निकल रही है।

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