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बारूद का चरित्र

सनातन संस्था नामक संगठन के लोग अगर बम बना रहे हों तो कैसा नजारा सामने आता है। वे लोग बारूद लेकर आए, उसे एक चौकी पर रखा, अगरबत्ती जलाई, शुद्ध करने के लिए उस पर गंगा जल के छींटे मारे। फिर बम बनाने की प्रक्रिया शुरू की। बारूद का शुद्धिकरण बहुत जरूरी है, तभी तो सनातन धर्म की रक्षा करने वाला बम बनेगा। फिर उसे स्कूटर पर रखने से पहले प्रार्थना की- हे बम, सिर्फ विधर्मियों को और सनातन धर्म के शत्रुओं को ही मारना और हमारे धर्म को मजबूत करने में सहयोग करना। बम ने प्रार्थना सुनी  या नहीं पता नहीं, वह स्कूटर पर फट गया और बम ले जाने वालों को मार दिया।

अब यही दृश्य आप लश्कर-ए-तैयबा या जैश-ए-मुहम्मद या ऐसे ही संगठन के दफ्तर में हो रहे हैं, यह कल्पना करें। शायद खास फर्क नहीं होगा, आरडीएक्स के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप को बदल कर उसे धर्म का हथियार बनाया जाता होगा, और चलाया जाता होगा। समस्या यह है कि बारूद का या गोली का अपना चरित्र नहीं बदलता। आतंकवादी अगर मुसलमान है तो वह यह दावा नहीं कर सकता कि उसके बम से कोई मुसलमान नहीं मरेगा, या मरेगा तो सीधे जन्नत में जाएगा।

सनातन संस्था वाले यह दावा नहीं कर सकते कि उनका बम चुन-चुन कर विधर्मियों को मारेगा। यह भी हुआ है कि उसने बनाने वालों को ही मार डाला। इतिहास गवाह है कि लोगों ने परधर्मियों को कम मारा, अपने धर्मावलंबियों को ज्यादा मारा। जो लोग धर्म के नाम पर हत्या करते हैं, वे अपने ही धर्म के लोगों को सबसे ज्यादा मारते हैं। पाकिस्तान में आतंकवादियों ने या कश्मीर में अलगाववादियों ने जिन लोगों को मारा है, वे उनके अपने धर्म के लोग हैं। हिंदुओं ने इलाके के लिए, जाति के नाम पर, संपत्ति के लिए जितने हिंदुओं को मारा, उतना तो किसी ने नहीं मारा।

स्टालिन ने जितने कम्युनिस्टों को मारा, उतनों को कम्युनिस्ट विरोधियों ने नहीं मारा और विभिन्न देशों में लोकतंत्र को नष्ट करने की जितनी सफल-असफल कोशिशें अमेरिका ने की, उतनी किसने की होगी? सनातन संस्था वाले बम बनाकर किसकी रक्षा कर रहे हैं, और किसे मार रहे हैं। अपने बम से वे खुद की रक्षा तो कर नहीं पाए, किसी और की क्या करेंगे? अच्छे भले नौजवान थे, कोई ढंग का काम  करते थे, अपना और समाज का भला कर सकते थे। लेकिन किसी ने उन्हें समझाया कि ज्यादा जरूरी है, किसी और को नष्ट करना, कुछ बनाना नहीं। बारूद किसी और का धर्म नहीं निभाती। उसका अपना धर्म होता है, उसे वह पूरा करती है।

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