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संगठनात्मक चुनाव को लेकर भाजपा में रस्साकशी तेज

भारतीय जनता पार्टी और उसके आनुषांगिक संगठनों के पदाधिकारियों का चुनाव नवंबर के  अन्तिम हफ्ते में होने की उम्मीद है। इसको लेकर पार्टी पदाधिकारियों में सक्रियता बढ़ गई है। सबसे ज्यादा वे लोग सक्रिय हैं जो किसी न किसी  वरिष्ठ नेता के खास हैं। कार्यकर्ताओं में अपनी पकड़ और अपने नेता की छवि के बल पर संगठन के विभिन्न पदों पर काबिज होने की कवायद तेज हो गई है। वैसे चुनाव की औपचारिक घोषणा नहीं हुई है लेकिन इसकी प्रबल संभावना को देखते हुए दावेदारों ने कार्यकर्ताओं से व्यक्तिगत संपर्क शुरू कर दिया है।

कुछ वर्ष पहले तक डॉ. मुरली मनोहर जोशी का गुट पार्टी संगठन में हावी था। लेकिन इलाहाबाद सीट से मिली शिकस्त के बाद डॉ. जोशी के वाराणसी चले जाने से यह खेमा थोड़ा शांत हुआ है, लेकिन डॉ. नरेन्द्र सिंह गौर और उदयभान करवरिया के रूप में डॉ. जोशी की उपस्थिति फिर भी कायम है।

भाजपा महानगर इकाई में डॉ. गौर की अच्छी पैठ है और उनकी खास दिलचस्पी भी। वह चाहेंगे कि उनका समर्थक महानगर इकाई पर काबिज हो। उदयभान करवरिया अगले विधानसभा चुनाव में अपना चुनाव क्षेत्र बदल सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक उनकी नजर शहर उत्तरी या दक्षिणी विधानसभा क्षेत्र पर है। इसलिए वह किसी का खुलकर तो समर्थन नहीं करेंगे लेकिन अपने किसी खास को आगे बढ़ाना जरूर चाहेंगे। पार्टी सूत्रों की मानें तो जोशी गुट में होने के बावजूद डॉ. गौर और उदयभान में अंदरखाने रस्साकशी की स्थिति है।

पूर्व प्रदेश भाजपाध्यक्ष केशरी नाथ त्रिपाठी की संगठन में मजबूत पकड़ है। वर्तमान जिलाध्यक्ष, महानगर अध्यक्ष सहित कई अन्य पार्टी पदाधिकारी इनके खास माने जाते हैं। डॉ. जोशी की सक्रियता कम होने से यह खेमा मजबूत स्थिति में है। केशरी गुट की कोशिश है कि अधिक से अधिक पदों पर उसका कब्जा हो ताकि संगठन में अपनी बात आसानी से मनवायी जा सके।

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