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ईराक के मरीज को पीजीआई में मिली नई जिन्दगी

कैंसर से पीड़ित ईराक के मुसुब हुसैन (28) का पीजीआई के डॉक्टरों ने सफल ऑपरेशन किया। ईराक के एक राजकीय मेडिकल में पैरामेडिकल स्टाफ में कार्यरत अहमद के साथ उसके दो अन्य साथी भी भारत पहुंचे हैं। तीनों न तो हिंदी जानते हैं और न ठीक से अंग्रेजी समझ पाते हैं। पीजीआई रोहतक में उन्हें भाषा की परेशानी जरूर हुई मगर यहां के लोगों की सहयोग भावना ने हर कदम पर उनका साथ दिया।

ईराक व पीजीआई प्रबंधन के बीच पांच माह पहले रोहतक में हुए वायदे के मुताबिक ईराक के डॉक्टरों ने कैंसर के मरीजों को भारत में भेजने का काम शुरू किया है। पांच माह पहले ईराक के डॉक्टरों का एक प्रतिनिधिमंडल पीजीआई रोहतक पहुंचा था और यहां की चिकित्सा सेवाएं देखी थी। स्तरीय सेवाओं से प्रभावित होकर ईराक के डॉक्टरों ने चिकित्सा सेवाओं के आदान-प्रदान पर सहमति जताई थी।

हुसैन ने बताया कि ईराक में इस तरह के कैंसर की शल्य चिकित्सा नहीं है। इसलिए उनको यहां आना पड़ा। शल्य चिकित्सा विभाग के डॉ. आरके कड़वासरा ने उनका ऑपरेशन किया है।  आपरेशन को 11 दिन हो चुके हैं। अब वे अपने मुल्क लौटना चाहते हैं।

ऑपेरशन के बाद कैंसर नहीं उभरने की बात पर हालांकि डॉ. कड़वासरा ने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। एक सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि इस ऑपरेशन में मरीज का डेढ़ लाख रुपए खर्च आया है। करीब 70 हजार रुपए के दो इंस्ट्रुमेंट भी इस खर्च में शामिल हैं। ईराक व पीजीआई के बीच कड़ी का काम करने वाले शर्मा ने बताया कि दिल्ली या अन्य किसी शहर में यह ऑपरेशन कराया जाता तो करीब 6 लाख रुपए खर्च आता।

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