DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

उत्तराखंड के विकास के लिए अलग नीति बने

कांग्रेस प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में हिमालयी राज्य उत्तराखंड के विकास के लिए अलग नीति बनाने की वकालत की गयी। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने संगठन की मजबूती के लिए सभी मतभेद भुलाकर एकजुटता से कार्य करने का आह्वान किया। बैठक में लोकसभा चुनाव में मिली सफलता के लिए जनता का आभार व्यक्त करने के साथ ही आठ राजनैतिक प्रस्ताव पारित किए। इस दौरान राज्य की भाजपा सरकार की दो दजर्न से अधिक विफलताओं को गिनाया गया।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष यशपाल आर्य ने कहा कि पर्यावरण संतुलन व भौगोलिक विषमताओं को ध्यान में रखते हुए उत्तराखंड के विकास की योजनाएं बनाई जानी चाहिए है। हर योजना आम आदमी को ध्यान में रखा जाए।
कांग्रेस के प्रदेश सहप्रभारी डा.भोला पाण्डेय ने कार्यकर्ताओं से कहा कि केन्द्र सरकार की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाएं ताकि 2012 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस फिर से सत्ता में आ सके।

बैठक में कांग्रेस संगठन के पुनर्गठन के लिए समिति का गठन करने, विधानसभा स्तर पर पांच सदस्यीय समन्वय समिति का गठन करने, कांग्रेस के अनुसांगिक संगठनों के गठन के लिए त्रिस्दस्यीय कमेटी बनाने, 2012 के चुनावों के लिए कांग्रेस कार्ययोजना बनाने को पांच सदस्यीय अनुश्रवण दल बनाने, जन समस्याओं की सूची तैयार कर उसे प्रदेश नेतृत्व को सौंपे जाने समेत आठ प्रस्तव व कई उप प्रस्ताव पारित किए गए।

बैठक में कहा गया कि राज्य की भाजपा सरकार अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति व अल्पसंख्यकों की घोर उपेक्षा कर रही है। बैठक में राज्य सरकार से दीक्षित आयोग की रिपोर्ट पर अविलंब अपनी नीति घोषित करने की मांग की गयी। साथ ही राशन काडोर्ं में मुख्यमंत्री का नाम छापे जाने को गंभीर अनियमितता बताया गया। राज्य में चल रही स्वैप परियोजना के संचालन में सरकार को विफल करार दिया गया। कहा गया कि जल विद्युत परियोजनाओं के लिए नीति स्पष्ट नहीं होने के कारण ऊर्जा प्रदेश के लोग विद्युत संकट से जुझ रहे हैं।
राज्य सरकार की विफलता के चलते राज्य कर्ज के बोझ से दबता जा रहा है। यही स्थिति रही तो 2010 तक राज्य 17 हजार करोड़ के कर्ज में डूब जाएगा। इस दौरान सरकार पर मैदानी क्षेत्रों में आ रहे उद्योगों को रोकने व पर्वतीय क्षेत्रों की उपेक्षा का आरोप भी लगाया गया।  बैठक में सांसद विजय बहुगुणा, केसी सिंह बाबा, विधायक जोत सिंह घुनसोला, तिलकराज बेहड़, शैलेन्द्र मोहन सिंघल, गोपाल राणा, कुंवर प्रणव कुमार, नवप्रभात, सुरेन्द्र सिंह नेगी, पूरन सिंह मेहता, मंत्री प्रसाद नैथानी आदि थे।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:उत्तराखंड के विकास के लिए अलग नीति बने