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मन्ना डे को दादा साहेब फाल्के पुरस्कार

मन्ना डे को दादा साहेब फाल्के पुरस्कार

राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने बुधवार को जाने-माने पार्श्वगायक मन्ना डे को वर्ष 2007 के लिए दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से विभूषित किया।

राजधानी स्थित विज्ञान भवन में एक शानदार समारोह में राष्ट्रपति ने 55वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार प्रदान करते हुए मन्ना डे को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया तथा पुरस्कार स्वरूप दस लाख रुपये और स्वर्ण कमल प्रदान किए। वर्ष 2007 के राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार वितरण समारोह में दक्षिण भारतीय और क्षेत्रीय फिल्मों का दबदबा रहा। स्वतंत्रता से पहले कांचीपुरम के बुनकरों की दशा पर बनी तमिल फिल्म कांचीवरम को सर्वश्रेष्ठ फिल्म के खिताब से नवाजा गया।

समारोह में सर्वोत्तम अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार कांचीवरम में एक संवेदनशील बुनकर की भूमिका निभाने वाले अभिनेता प्रकाश राज को प्रदान किया गया। फिल्म के निर्देशक प्रियदर्शन को भी सम्मानित किया गया। वहीं,  कन्नड़ फिल्म गुलाबी टाकीज के लिए उमाश्री को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के सम्मान से अलंकृत किया गया।

शाहरुख खान अभिनीत चक दे इंडिया को सर्वश्रेष्ठ लोकप्रिय और मनोरंजक फिल्म का खिताब प्रदान किया गया। फिल्म निर्माता आदित्य चोपड़ा की ओर से उनके पिता यश चोपड़ा एवं निर्देशक शिमित अमीन ने पुरस्कार प्राप्त किया। समारोह में आमिर खां की तारे जमीं पर फिल्म को तीन पुरस्कार प्रदान किए गए।

इस अवसर पर राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने मनोरंजन के साथ सामाजिक बदलाव लाने वाली फिल्मों का पक्ष लेते हुए कहा कि विदेशी बाजारों में भारतीय फिल्मों को एक अलग पहचान मिली है, जो भारत की सॉफ्ट पॉवर बढ़ने का उदाहरण है।

मन्ना डे को दादा साहेब फाल्के पुरस्कार प्रदान करने के बाद राष्ट्रपति ने कहा कि मन्ना डे ने हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत और लोकप्रिय संगीत के अंतर को मिटाया है। डिस्लैक्सिया पीड़ित बच्चों की कहानी पर आमिर खान निर्मित और अभिनीत तारे जमीं पर को परिवार कल्याण के मुद्दे पर बनी सर्वश्रेष्ठ फिल्म के पुरस्कार से नवाजा गया। इस फिल्म के गीत अंधेरे से डरता हूं मैं मां के लिए शंकर महादेवन और प्रसून जोशी को क्रमशः सर्वश्रेष्ठ पार्श्वगायक और गीतकार के खिताब प्रदान किए गए। वहीं, जब वी मेट के गीत ये इश्क हाय के लिए श्रेया घोषाल ने सर्वश्रेष्ठ पार्श्वगायिका का पुरस्कार प्राप्त किया। शंकर महादेवन और श्रेया घोषाल ने समारोह में इन गीतों की मंचीय प्रस्तुति भी दी। जब वी मेट के खाते में सर्वश्रेष्ठ नृत्य निर्देशन का पुरस्कार भी आया।

अनिल कपूर प्रोडक्शंस की गांधी माय फादर के लिए दर्शन जरीवाला को सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता और द लास्ट लीयर के लिए शेफाली शाह को सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री का पुरस्कार प्रदान किया गया। गांधी माय फादर को निर्णायक मंडल के विशेष पुरस्कार से भी नवाजा गया। इसे अनिल कपूर की अभिनेत्री सुपुत्री सोनम कपूर ने प्राप्त किया।

मशहूर फिल्मकार अदूर गोपालकृष्णन ने मलयालम फिल्म नालू पेनुंगल के लिए सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का पुरस्कार जीता जो उनका सातवां राष्ट्रीय पुरस्कार है। फिल्म ओम शांति ओम के लिए साबू साइरिल को सर्वश्रेष्ठ कला निर्देशक का खिताब मिला। भावना तलवार की फिल्म धरम को राष्ट्रीय अखंडता पर बनी सर्वश्रेष्ठ फिल्म के नरगिस दत्त पुरस्कार से नवाजा गया। सामाजिक मसलों पर बनी सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार हिन्दी फिल्म अंतर्द्वंद ने जीता।

सर्वश्रेष्ठ बाल कलाकार का पुरस्कार मराठी फिल्म टिंग्या के लिए शरद गोयकर को दिया गया। सर्वश्रेष्ठ पटकथा
का पुरस्कार गांधी माय फादर के लिए फिरोज अब्बास खान को प्रदान किया गया। समारोह में रजनीकांत की बहुचर्चित फिल्म शिवाजी को सर्वश्रेष्ठ विशेष प्रभाव के पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

अमृत सागर की 1971 और रितुपर्णो घोष की द लास्ट लीयर को क्रमशः सर्वश्रेष्ठ हिन्दी और अंग्रेजी फीचर फिल्म के पुरस्कारों से विभूषित किया गया। सर्वश्रेष्ठ गैर फीचर फिल्म का पुरस्कार अंग्रेजी और हिन्दी में बनी होप डाइज लास्ट इन वार को मिला। सिनेमा पर सर्वश्रेष्ठ लेखन का पुरस्कार बी डी गर्ग की किताब फ्रॉम राज टू स्वराजः द नॉन फिक्शन फिल्म इन इंडिया ने जीता। इसका प्रकाशन पेंग्विन ने किया है।

55वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों के फीचर फिल्म वर्ग की चौदह सदस्यीय ज्यूरी की अध्यक्षता मशहूर फिल्मकार सई परांजपे ने की। वहीं, वृत्तचित्र निर्माता अशोक विश्वनाथन गैर फीचर फिल्म वर्ग की ज्यूरी के अध्यक्ष थे। लेखिका नमिता गोखले सिनेमा पर सर्वश्रेष्ठ लेखन की ज्यूरी की अध्यक्ष थीं। विजेताओं का चयन 102 फिल्म और 106 गैर फीचर फिल्मों में से किया गया। इसमें फीचर फिल्म के खंड में 31 श्रेणियों में पुरस्कार दिए जाते हैं। गैर फीचर फिल्म खंड में 22 श्रेणियों में पुरस्कार प्रदान किए जाते हैं। समारोह में सूचना एवं प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी, सूचना प्रसारण राज्य मंत्री एस जगतरझणन, चौधरी मोहन जतुआ, ऑल इंडिया फिल्म एंप्लॉइज फेडरेशन के अध्यक्ष धर्मेश तिवारी आदि मौजूद थे।

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