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किराए पर मकान

शहरों खासकर मैट्रो में जिस तरह से मकान की कीमतों में इजाफा हुआ है, उससे आम आदमी के लिए अपना आशियाना बना पाना एक सपना बन चुका है। मैट्रो शहरों में देश की विभिन्न जगहों से लोग रोजगार की तलाश में आते हैं। ऐसे में किराए के मकान में रहना लोगों की मजबूरी है। किराए पर मकान लेते वक्त कुछ बातों को ध्यान में रखना जरूरी है, ताकि बाद में किसी भी तरह की मुसीबत से बचा जा सके।

जब आप मकान किराए पर लें, तो आप कुछ कागजों की ठीक से जांच कर लें। टाइटल डाक्यूमेंट को चेक करने से आपको यह पता चल जाएगा कि मकान का असली मालिक कौन है। इसके बाद बात आती है बिजली और नगरपालिका के बिल की। गौर करें कि क्या इन बिलों का भुगतान किया जा चुका है।

रेंट एग्रीमेंट बनाते वक्त किराएदार को यह जांच करनी जरूरी है कि उसमें क्या शर्ते दी गई हैं, मसलन क्या उसमें यह जिक्र है कि अगले वर्ष मकान मालिक कितना प्रतिशत किराया बढ़ाएगा। रेंट एग्रीमेंट में दर्शाया जाता है कि यह मकान किस दिन से व्यक्ति को किराए पर दिया जा रहा है, साथ ही इससे कमर्शियल या रिहायशी इस्तेमाल की इजाजत उस व्यक्ति को है, कितनी अवधि तक के बाद रिन्यूएल किया जाएगा, मकान खाली करने या कराने की स्थितियां क्या हैं?

एग्रीमेंट में इस बारे में भी बताया जाता है कि आपने कितनी सिक्योरिटी मनी या एडवांस किराया डिपॉजिट किया है। अधिकांशत: रेंट एग्रीमेंट 11 माह के होते हैं, उसमें यह जिक्र होता है कि मकान खाली करने या कराने की स्थिति में दो या तीन महीने पहले जानकारी दी जाएगी। दोनों पक्षों के लिए यह जरूरी है कि वह एग्रीमेंट की एक-एक कॉपी अपने पास रखें, ताकि ऐन वक्त पर कोई भी अपनी बात से मुकर न जाए।

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