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अपराधियों का सफाया करने की पूरी छूट है पुलिस को

मुख्यमंत्री मायावती ने कहा कि माफिया का सफाया करने के लिए पुलिस वालों को पूरी छूट है। अपराधी चाहे जितना ही प्रभावशाली क्यों न हो, उसे कतई बख्शा न जाए। अन्याय मुक्त, भ्रष्टाचार मुक्त और विकास युक्त प्रदेश ही मेरी सरकार की प्राथमिकता है। पुलिस को इस तरह से काम करना चाहिए कि उनका भय अपराधियों में हो। हर हाल में दबे कुचले वर्ग को न्याय मिल सके।

उन्होंने पुलिस महकमे की तारीफ करते हुए कहा कि चित्रकूट में घनश्याम केवट के साथ हुई मुठभेड़ में पुलिस वालों ने जो बहादुरी दिखाई, वह महकमे के लिए गर्व की बात है। ढाई साल में पुलिस ने कई उपलब्धियाँ अजिर्त की है। दूसरे राज्यों के अपराधियों का भी सफाया करके पुलिस ने अपनी बहादुरी साबित की है।

मुख्यमंत्री ने यह सब बुधवार को पुलिस स्मृति दिवस पर पुलिस लाइन में आयोजित शोक परेड की सलामी लेने के बाद कहा। उन्होंने पुलिस की कई उपलब्धियों को खुले दिल से सराहा और उनका मनोबल बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार पुलिस वालों की हर सम्भव मदद करने के लिए तत्पर है। ड्यूटी के दौरान शहीद हुए पुलिस वालों के परिवारीजनों की सहायता हर स्तर पर की जाएगी।

शहीदों के परिवारों को आश्वस्त करते हुए उन्होंने कहा कि शासन एवँ पुलिस विभाग उनकी हर मुसीबत की घड़ी में साथ है। उन्होंने कहा कि बहादुर पुलिस वालों को आउट आफ दर्न प्रोन्नति दी गई है। वीरता पदक से भी नवाजा गया है। आधुनिक उपकरणों की खरीदफरोख्त के लिए उनकी सरकार पहले ही 35 करोड़ रुपए स्वीकृत कर चुकी है। इसके अलावा महकमे की अन्य सुविधाओं के लिए भी 245 करोड़ का बजट दिया जा चुका है। इसके अलावा विभिन्न निधियों के माध्यम से भी पुलिस वालों को आर्थिक मदद मुहैया कराई गई है।

साथ ही नियतन के मानकों का पुन: निर्धारण करके दो लाख चार हजार 31 खाली पदों पर नियुक्ति शुरू करने के लिए भी कहा जा चुका है। इससे पहले मुख्यमंत्री ने शोक परेड की सलामी लेने के बाद पुलिस लाइन में ही बने स्मारक पर पुष्प अर्पित कर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। इसी के साथ शहीद पुस्तिका मंच पर ले जाई गई। डीजीपी करमवीर सिंह ने कहा पुलिस वालों को प्राय: असामान्य परिस्थितियों में काम करना पड़ता है जिसमें कई बार उनकी जान संकट में पड़ जाती है।

कानून व्यवस्था के अलावा बाढ़, भूकम्प, अग्निकाण्ड जैसी विपत्तियों में भी पुलिसकर्मी जान जोखिम में डालकर अपनी ड्यूटी निभाते हैं। उन्होंने बताया कि एक सितम्बर 08 से 31 अगस्त 09 के बीच 107 पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे। इन पुलिस वालों में एक इंस्पेक्टर, 17 उपनिरीक्षक, एक एसआई (एम), तीन एएसआई (एम), 16 मुख्य आरक्षी, 65 आरक्षी, दो आरक्षी चालक और दो फायरमैन शामिल हैं।

इस मौके पर परेड का नेतृत्व एसएसपी प्रेम प्रकाश ने किया जबकि सैन्य सहायक के रूप में फैजाबाद के डिप्टी एसपी जनक प्रसाद द्विवेदी मौजूद थे। इसके अलावा पुलिस लाइन में कैबिनेट सचिव शंशाक शेखर सिंह, प्रमुख सचिव गृह कुँवर फतेह बहादुर, एडीजी (पूर्वी) बृजलाल, एडीजी (पश्चिमी) एके जैन, आईपीएस पीपीएस सिद्धू, एकेडी द्विवेदी, राजीव कृष्णा, एएसपी शलभ माथुर, अमित पाठक समेत कई पुलिस अधिकारी व उनके परिवारीजन मौजूद थे।

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