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जनता की बात करने वाले ईमानदारी से निभाएं जिम्मेदारी: नीतीश

जनता की बात करने वाले ईमानदारी से निभाएं जिम्मेदारी: नीतीश

नीतीश कुमार ने कहा कि बिहार के लोग अपनी-अपनी जिम्मेदारी का पूरी ईमानदारी से पालन करें। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की राय में यही इस राज्य के विकास का मूलमंत्र है। जनता अपना काम बखूबी कर रही है। अब जनता की बात करने या जनता के नाम पर काम करने वाले लोगों, चाहे वह नेता हो या समाजसेवी, मीडिया हो या आलोचक। सबको अपनी भूमिका अदा करनी पड़ेगी।

मंगलवार को हिन्दुस्तान समागम 2009 में मुख्यमंत्री  ने कहा कि देश को 2020 तक विकसित बनाने का लक्ष्य है लेकिन हम बिहार को 2015 तक ही विकसित राज्यों की कतार में लाना चाहते हैं।  समागम का विषय था ‘बिहार 2020 : दशा-दिशा’।

कुमार ने कहा कि बिहार अपने कारणों से तो पीछे गया ही, दिल्ली की नीतियों ने भी इसको लगातार पीछे किया। अंग्रेजों के शासन में तो राज्य के साथ भेदभाव हुआ ही, आजादी के बाद भी बिहार के साथ दोयम दर्जे का व्यवहार हुआ। स्वतंत्रता के समय पूर्वी राज्य अधिक विकसित थे। ‘फ्रेट इक्वेलाइजेशन’ की नीति ने बिहार के विकास की संभावना ही समाप्त कर दी। देख लीजिए पहली पंचवर्षीय योजना के समय से ही राज्य में कितना निवेश हुआ?

विकास को लेकर अलग-अलग अवधारणा है। कुछ लोग समावेशी विकास की बात करते हैं जबकि मैं न्याय के साथ विकास की बात करता हूं। समावेशी विकास का मतलब है, सभी वर्ग और सभी क्षेत्रों का एकसमान विकास। लोगों को सोचना पड़ेगा कि समावेशी विकास की बात करने वाले बिहार के बढ़ते कदम को क्यों पीछे खीचना चाहते हैं? बिहार में बदलाव आ रहा है। इस मुद्दे पर राजनीतिक दल तो एक-दूसरे के खिलाफ बोलते ही रहेंगे लेकिन महत्वपूर्ण यह है कि बदलाव के विषय में लोग क्या सोचते हैं?
   
बिहार के लोग मेधावी होते हैं और स्वभाव से प्रवासी भी। देश ही क्यों विदेशों में भी बिहार के लोग मिल जायेंगे। हमारे पूर्वज मारिशस तब गये जब चप्पूओं वाले जहाज चला करते थे। दुनिया हमारी प्रतिभा का लोहा मानती है। देश की कोई भी प्रतियोगिता परीक्षा हो, सबसे अधिक सफलता बिहार के छात्र और युवा ही पाते हैं। इसी कारण दूसरे प्रदेश वालों को हमसे ईर्ष्या होती है। जो खुद सफल नहीं हो पाते वही हमें आगे बढ़ने से रोकना चाहते हैं। किसी न किसी तरह बिहार को दबाने की कोशिश हो रही है। कभी दूसरे प्रदेशों में हमारे लोगों को सताया जाता है तो कभी उच्च शिक्षा पाने की राह में बाधा खड़ी की जाती है।

केन्द्र सरकार अब +2 में 80 प्रतिशत प्राप्तांक लाने वाले छात्रों को ही आईआईटी की प्रवेश परीक्षा में बैठने की इजाजत देने पर विचार कर रही है। दिल्ली को क्या जरूरत है ऐसे नये-नये प्रयोग करने की? इससे तो सर्वाधिक नुकसान बिहारी छात्रों का ही होगा। मैंने केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल को पत्र लिखकर उनके इस निर्णय का विरोध किया है। सोचना पड़ेगा कि लोगों को एक प्रदेश से दूसरे प्रदेश आने-जाने से रोक कर हम 2020 में कैसा भारत बनाना चाहते हैं? हम बार-बार बिहार के स्वर्णिम इतिहास और बिगड़े वर्तमान की बात करते रहते हैं। इससे क्या होगा? जरूरत है समग्र प्रयास करने की। हम जो कर सकते हैं, करते रहे। मेरा मानना है कि बिहार का भविष्य उज्जवल है। राज्य का विकास बिल्कुल होगा।

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